कांग्रेस की असल चिंता सरकार विरोधी लहर को लेकर बढ़ रही है। एक-दो महीने तक जहां सरकार विरोधी लहर की रफ्तार काफी धीमी थी, वहीं पिछले दो सप्ताह से तेजी से बढ़ने लगी है। दूसरी चिंता जद(एस) को लेकर है। जद(एस) ने 100 सीटों को फोकस करके अपने प्रचार अभियान को तेज किया है। जद(एस) के नेता एचडी कुमार स्वामी कहते हैं कि वैसे तो पार्टी 150 से अधिक सीटों पर मुकाबले में है, लेकिन 100 सीटों पर अच्छे नतीजे आने की उम्मीद है।
दक्षिणी कर्नाटक में कांग्रेस का जद(एस) के प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला है। भाजपा ने भी 170-175 सीटों को ध्यान में रखकर पूरा जोर लगाया है। उत्तरी, तटीय और मध्य कर्नाटक में भाजपा के उम्मीदवार कांग्रेस के प्रत्याशियों के मुकाबले में है। आखिरी चिंता श्रीरामुलु, येदियुरप्पा और गली जनार्दन रेड्डी की एकजुटता से पैदा हुई है। इन नेताओं की एकजुटता से हैदराबाद कर्नाटक में 40 विधानसभा सीटों के समीकरण पलट सकते हैं। गुलबर्ग, बीदर, रायचुर, बेल्लारी, कोप्पल, यादगीर इसके चलते कड़े मुकाबले की नौबत आ रही है।
कुछ समय पहले तक भाजपा का पलड़ा जहां कुछ कमजोर माना जा रहा था, उसने अपनी स्थिति में तेजी से सुधार किया है। पार्टी नेताओं के अनुसार उत्तरी, तटीय और मध्य कर्नाटक में समीकरण उनके पक्ष में बन रहे हैं। मैसूर में टीपू सुल्तान के मुद्दे से भी उन्हें राज्य में फायदा होता दिखाई दे रहा है। केन्द्रीय मंत्री और कर्नाटक के प्रभारी प्रकाश जवड़ेकर के साथ पिछले छह महीने से सक्रिय सूत्र के अनुसार इन क्षेत्रों की 150 सीटों में से भाजपा यदि 80 के आंकड़े को पार कर जाए तो हमें कोई ताज्जुब नहीं है। भाजपा नेताओं के अनुसार 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 35 फीसदी वोट मिले थे।
इसके बरक्स भाजपा 17 को फीसदी, जद(एस) को 16 तथा
येदियुरप्पा की पार्टी को 14 फीसदी वोट मिले थे। श्रीरामुलु ने भी अलग पार्टी बनाई थी। इस बार येदिरप्पा भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार है। श्रीरामुलु भाजपा के सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 47 फीसदी तो कांग्रेस को 45 फीसदी वोट मिले थे। इस आधार पर भाजपा नेताओं का कहना है कि उनके विरुद्ध कोई सरकार विरोधी लहर नहीं है और राज्य में उनकी पार्टी के पूर्ण बहुमत पाने के आसार हैं। केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार का कहना है कि मतगणना के बाद भाजपा को लेकर किसी के पास कोई संशय नहीं रह जाएगा। हम राज्य में सरकार बनाने जा रहे हैं।
कांग्रेस बार-बार विकास और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विरोधियों को घेर रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने पांच साल के शासन में भ्रष्टाचार का सबूत मांग रहे हैं। जबकि भाजपा उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है। प्रधानमंत्री खुद अपनी जनसभा में बंगलूरु को सिटी ऑफ गारबेज कह चुके हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का दावा है कि उनकी सरकार ने जमकर राज्य का विकास कार्य किया है। लेकिन इसके बावजूद चुनाव में विकास बड़ा मुद्दा नहीं बन पा रहा है। भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के लिए जोर लगा रही है तो कांग्रेस भाजपा के इस कार्ड को पस्त करने के लिए जातिगत समीकरण खेल रही है।
कांग्रेस को कर्नाटक में गांवों से काफी उम्मीद है। सुष्मिता देव भी कहती हैं कि गांव का मतदाता कांग्रेस के साथ है। इसके जवाब में भाजपा को गांव के साथ-साथ शहरी वोटों पर भरोसा है। राज्य में कांग्रेस के उम्मीदवार लगभग सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला कहीं जद(एस) के उम्मीदवार से है तो कहीं भाजपा उम्मीदवार से। इन सबके बीच में विकास का मुद्दा रह-रहकर आ जा रहा है।