कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के साथ मिलकर सरकार चला रही कांग्रेस के लिए परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। उसके बागी विधायकों ने जारी व्हिप का अनादर किया और बुधवार से शुरू हुए विधानसभा के बजट सत्र से दूर रहे। कांग्रेस के सात विधायक जिसमें से चार मुंबई में रुके हुए हैं उन्होंने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया और जिसका पूरा फायदा भाजपा को मिला।
भाजपा ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बजाए राज्यपाल वजुभाई आर वाला के दोनों सदनों को दिए जा रहे अभिभाषण को बाधित किया। जैसे ही वाला ने हिंदी में अपना अभिभाषण शुरू किया। भाजपा के सदस्य वेल में आ गए और उन्होंने नारे लगाना शुरू कर दिए। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वह अपना अभिभाषण न दें। उनका आरोप था कि सरकार के पास बहुमत नहीं हैं क्योंकि लगभग एक दर्जन विधायक गैरमौजूद हैं।
वाला ने उनसे अनुरोध किया कि वह तब तक अपनी सीटों पर बैठ जाएं जबतक कि उनका अभिभाषण खत्म नहीं होता है लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार का सुझाव मानते हुए सीधे अपने भाषण का आखिरी पैराग्राफ पढ़ा। उन्होंने केवल 10 मिनट में अपने भाषण को खत्म कर दिया। उनके अभिभाषण के बाद स्पीकर ने स्पष्ट किया कि अभिभाषण पढ़ा जा चुका है। जिसके बाद विधानसभा स्थगित हो गई।
वहीं भाजपा कर्नाटक के मुखिया बीएस येदियुरप्पा ने भाजपा विधायकों के विरोध प्रदर्शन के कारण कल सुबह 11 बजे तक के लिए विधानसभा स्थगित होने पर कहा, 'उनके (राज्स सरकार) पास बहुमत नहीं है। इसी वजह से उनके पास सरकार में रहने का कोई अधिकार नहीं है। हम कल भी अपना विरोध जारी रखेंगे।'
भाजपा द्वारा राज्य सरकार पर बहुमत न होने का आरोप लगाए जाने पर कांग्रेस के सिद्धारमैया ने कहा, 'उन्हें अविश्वास प्रस्ताव पेश करने दीजिए। उन्हें कौन रोक रहा है? हमने विधायक दल की बैठक बुलाई है। वह सभी (कांग्रेस के 4 असंतुष्ट विधायक) कल वापस आ जाएंगे। कल बजट पेश किया जाएगा। सरकार के पास बहुमत है।'