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कर्नाटक: विधायकों संग धरने पर बैठे सीएम शिवकुमार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ एफआईआर की मांग; ये आरोप लगाए

Thu, 01 Oct 2026 07:30 PM IST
अमन मौर्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार ने मतदाता सूची संशोधन में 'चुनावी धोखाधड़ी' के खिलाफ सीईओ कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने एफआईआर दर्ज होने और जांच के आदेश मिलने तक हटने से इनकार किया है।
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विधायकों संग धरने पर बैठे सीएम शिवकुमार, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ एफआईआर की मांग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ मिलकर गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अन्बुकुमार के कार्यालय के बाहर धरना दिया। वे मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) के दौरान कथित 'चुनावी धोखाधड़ी' को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक जांच के आदेश नहीं दिए जाते और एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे नहीं हटेंगे। धरने की घोषणा करने से पहले शिवकुमार ने अन्बुकुमार के साथ लगभग ढाई घंटे तक बैठक भी की थी।
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सीएम ने क्या मांग रखी?
सीएम शिवकुमार ने जांच के लिए ऑर्डर जारी होने और एफआईआर दर्ज होने तक डटे रहने का बात कही। सीईओ कार्यालय के बाहर धरना देने के लिए मुख्यमंत्री ने गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक भी टाल दी। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
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मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि वे वोटरों को चुराने और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वे ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों से 10,000 या 15,000 वोट हटा देते हैं, तो क्या वे लोकतंत्र की पीठ में छुरा नहीं घोंप रहे हैं? कांग्रेस पार्टी ने आजादी के लिए लड़ाई क्यों लड़ी? हमने देश को संविधान क्यों दिया? यह पूरे देश के लिए एक बड़ा सवाल है।
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विपक्ष पर लगाया ये आरोप
सीएम ने कहा कि मुझे बताया गया था कि चुनाव आयोग ने उन्हें कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की छूट दी है। लेकिन फिर भी, हमारा चुनाव आयोग अभी भी कानूनी अधिकारी के आने और उन्हें सलाह देने का इंतजार कर रहा है। इस राज्य में हर वोटर के अधिकार की रक्षा करना बहुत जरूरी है और यह जिम्मेदारी मेरी है। मुख्यमंत्री के तौर पर, मैंने राज्य चुनाव आयोग का सहयोग किया है। हमने वोटरों को रिहायशी प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी प्रमाण पत्र देकर मदद की है ताकि वे अपने दस्तावेजों की असलियत और वैधता साबित कर सकें और वोटर बनने की अपनी पात्रता दिखा सकें, लेकिन फिर भी, जनता दल और बीजेपी की मिलीभगत से इस तरह की आपराधिक गतिविधि और बड़ी साजिश चल रही है।
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