वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी यह वन मैन शो साबित हो रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष
राहुल गांधी पिछले तीन महीने से राज्य में आ रहे हैं। इस दौरान वह विभिन्न मठों, मंदिरों, चर्च और गुरुद्वारों में भी गए लेकिन उनका मतदाताओं के बीच उतना क्रेज देखने को नहीं मिल रहा है जितना मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का है।
कांग्रेस का चुनाव प्रचार एक तरह से सिद्धारमैया पर टिका हुआ है। यही नहीं वह प्रधानमंत्री मोदी को भी रैलियों के साथ ही सोशल मीडिया पर जवाब दे रहे हैं। सिद्धारमैया कन्नड़ में भाषण देकर स्थानीय जनता खासकर ग्रामीणों को पार्टी से जोड़ने में सफल हो रहे हैं। सिद्धारमैया अपनी रैलियों में स्थानीय मुद्दों को उठाकर लोगों का ज्यादा ध्यान खींच रहे हैं।
किंगमेकर बन सकती है जद-एस
वहीं राज्य की तीसरी ताकत जद-एस की बात करें तो एचडी कुमारस्वामी पार्टी की तरफ से प्रमुख प्रचारक हैं। बीमार चल रहे देवगौड़ा ने कुछ ही रैलियां की हैं। पार्टी का जोर वोक्कालिगा बहुल्य सीटों पर ज्यादा है। चुनाव विश्लेषक जद-एस को ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं लेकिन त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में पार्टी किंगमेकर बन सकती है। इसी को देखते हुए पीएम मोदी जद-एस पर तीखे हमले नहीं कर रहे हैं। एक रैली में तो उन्होंने खुलकर देवगौड़ा की प्रशंसा भी की थी।