पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस कुरियन जोसेफ भी जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सरकार को भेजने का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने नाम वापसी पर चिंता जताते हुए कहा था कि अब वह सब हो रहा है, जो कभी नहीं हुआ।
दोबारा भेजा तो सरकार को स्वीकार करना होगा
आज अगर कॉलेजियम ने जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सरकार के पास भेजा तो केंद्र को उसे स्वीकार करना ही होगा। विधि विशेषज्ञों के अनुसार सरकार को सुप्रीम कोर्ट के 1993 और 1998 में दिए दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। हालांकि, सरकार द्वारा कॉलेजियम की अनुशंसा पर फैसला लेने की कोई तय समय सीमा नहीं है, यानी सरकार चाहे तो इसे ठंडे बस्ते में डाल सकती है।
विपक्ष का आरोप
सरकार द्वारा जस्टिस जोसेफ का नाम नामंजूर किए जाने के बाद विपक्ष ने कहा था कि उन्हें उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाने की सजा मिल रही है। जस्टिस जोसेफ 2016 में कांग्रेस शासित उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का मोदी सरकार का फैसले खारिज करने वाली पीठ के अध्यक्ष थे।