कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में करीब तीन महीने से ताल ठोक रही पार्टियों के बीच जुबानी जंग बृहस्पतिवार को खत्म हो गई। अब शनिवार को राज्य के 4.97 करोड़ मतदाता 2600 से ज्यादा प्रत्याशियों की किस्मत का बटन दबाएंगे। अगर मतदाताओं ने 33 साल से चली आ रहे सत्तारूढ़ दल को हटाने की परंपरा तोड़ी तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार वापसी करेगी। गौरतलब है कि 1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता दल ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। इसके बाद कोई भी पार्टी ऐसा कर पाने में सफल नहीं हुई।
1985 में रामकृष्ण हेगड़े के नेतृत्व में जनता दल ने की थी राज्य में वापसी
अस्तित्व बचाए रखने को लड़ रहा है जद (एस)
ज्यादातर सर्वेक्षणों के मुताबिक, इस बार राज्य में कांग्रेस और भाजपा मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं, जबकि जद (एस) किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहा है। कांग्रेस पंजाब के बाद दूसरे बड़े राज्य में अपनी सरकार बचाने का संघर्ष कर रही है, तो भाजपा एक और राज्य की सत्ता पर काबिज होने की जद्दोजहद में है। एक दशक से राज्य की सत्ता से बाहर जद (एस) अस्तित्व को बचाए रखने की कोशिशें कर रहा है।
4.96 करोड़ मतदाता दबाएंगे 2600 प्रत्याशियों की किस्मत का बटन
इतिहास खिलाफ, लेकिन रचेंगे इतिहास : सिद्धारमैया
भाजपा 2008 से 2013 तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही, लेकिन अंदरूनी कलह और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण कर्नाटक को स्थिर सरकार नहीं दे पाई। पांच साल में बने तीन सीएम में एक बीएस येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भी जाना पड़ा था। सीएम सिद्धारमैया का कहना है कि इतिहास उनके खिलाफ है, लेकिन वह इतिहास रचेंगे। सिद्धारमैया समेत चार पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव मैदान में हैं।
55.6 हजार बूथ की सुरक्षा में तैनात होंगे साढ़े तीन लाख सुरक्षाकर्मी
2013 में अलग हुए नेता इस बार भाजपा के साथ
भाजपा ने इतिहास को दोहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। पार्टी ने अपना प्रचार अभियान 150 सीटों के लक्ष्य के साथ शुरू किया। हालांकि, ये दूसरी बात है कि बृहस्पतिवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 130 सीटों पर जीत का दावा किया। 2013 के उलट केजेपी बनाने वाले येदियुरप्पा और बीएसआर कांग्रेस का गठन करने वाले बी. श्रीरामुलु इस बार भाजपा के साथ हैं। भाजपा के लिए पीएम ने खुद अभियान की कमान संभाली तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आक्रामक नजर आए।
ऐप से पता चलेगा, बूथ पर कितनी लंबी है कतार
मतदान के लिए राज्य में बनाए गए 55,600 पोलिंग स्टेशनों की सुरक्षा के लिए साढ़े तीन लाख सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। पहली बार चुनिंदा पोलिंग स्टेशनों पर दिव्यांग कर्मी भी तैनात किए गए हैं। वहीं, एक नई व्यवस्था के तहत मतदाता एक मोबाइल ऐप डाउनलोड कर पता कर सकता है कि उसके पोलिंग बूथ पर कितनी लंबी कतार है। राज्य के 4 करोड़ 96 लाख से ज्यादा मतदाताओं में 2.52 करोड़ पुरुष, 2.44 करोड़ महिलाएं और 4,552 किन्नर हैं।