कारगिल युद्ध के नायक रहे मेजर डीपी सिंह ने नासिक में पहली बार सफल स्काईडाइविंग की है। उन्होंने ऐसा करके दिखा दिया है कि शारीरिक कमजोरी किसी को आसमान में उड़ाने से नहीं रोक सकती। मेजर सिंह को भारत का अग्रणी ब्लेड रनर (कृत्रिम पैरों की मदद से दौड़ने वाले धावक) भी कहा जाता है।
मेजर सिंह ने कारगिल युद्ध में अपना दांया पैर खो दिया था। लेकिन उनकी हिम्मत जरा भी कम नहीं हुई। वह कई बार मैराथन में दौड़ चुके हैं। उनके दांए पैर के जाने के बाद कृत्रिम पैर लगाया गया। उन्हें शुरुआत में दौड़ने में तकलीफ हुई लेकिन वो हारे नहीं। वह अब स्काईडाइव पूरा करने वाले पहले भारतीय दिव्यांग जवान बन गए हैं।
मेजर सिंह को डाइव के लिए 18 मार्च से प्रशिक्षण दिया जा रहा था। सेना ने साल 2018 ड्यूटी के दौरान अपने हाथ, पैर खोने वाले जवानों को समर्पित किया था। सेना प्रमुख बिपिन रावत से इस गतिविधि की मंजूरी मिलने के बाद मेजर सिंह को प्रशिक्षण दिया गया।
मेजर सिंह ना केवल जवानों बल्कि आम लोगों के लिए भी एक प्रेरणा हैं। उनसे लोगों को संदेश मिलता है कि मजबूत इरादों वाले बहादुर लोगों के लिए शारीरिक कमजोरी कोई कमजोरी नहीं है।