कारगिल की बर्फीली चोटियों पर बहादुरी का परचम फहराने वाले जंबाजों में से एक पठानकोट के घरोटा निवासी वीरचक्र विजेता कैप्टन रघुनाथ सिंह की आंखों में आज भी उस संघर्ष के नायक विक्रम बत्रा की तस्वीर सजीव है। विक्रम बत्रा ने जंग में बुरी तरह घायल हुए जूनियर साथी को बचाने की खातिर जान भी कुर्बान कर दी। कैप्टन रघुनाथ सिंह याद करते हैं, 7 जुलाई 1999 को कैप्टन विक्रम बत्रा को मास्को घाटी की पॉइंट 4875 की चोटी को आजाद करवाने का दायित्व मिला। इस दौरान वह भी उनके साथ थे।
बहादुरी से लड़ते हुए कैप्टन बत्रा ने चोटी आजाद करवा ली। मिशन पूरा होने के बाद कैप्टन विक्रम की नजर अपने जूनियर साथी लेफ्टिनेंट नवीन पर पड़ी, जिसका पांव दुश्मन द्वारा फेंके ग्रेनेड से बुरी तरह जख्मी हो गया था। कैप्टन बत्रा नवीन को कंधे पर उठा सुरक्षित जगह पर लेकर जा रहे थे। तभी पाक सैनिकों ने उन पर हमला बोल दिया तथा एक गोली उनके सीने को भेदते हुए निकल गई। वह खून से लथपथ थे, मगर साथी को सुरक्षित जगह पर पहुंचाने के बाद भी पाक सेना के पांच सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया और खुद शहादत दे दी।
कैप्टन रघुनाथ ने बताया, कैप्टन बत्रा ने 10 पाक सैनिकों को मारकर पॉइंट 5140 चोटी पर भी तिरंगा फहराया। कैप्टन बत्रा की शहादत के बाद रघुनाथ (अब रिटायर्ड कैप्टन) ने कमान संभाली और साथियों संग रेंगते हुए हमला बोला और पाक सेना के ग्रुप कमांडर इम्तियाज समेत 12 पाक सैनिकों को मौत के घाट उतार बर्फीली चोटी पर भी तिरंगा फहराया।
13 जैक राइफल यूनिट को सबसे ज्यादा वीरता पदक
कैप्टन रघुनाथ सिंह ने बताया, भारतीय सेना के इतिहास में सिर्फ 13 जैक राइफल यूनिट को कारगिल के एक ही ऑपरेशन में दो परमवीर चक्र, 8 वीर चक्र, 13 सेना मेडल व 30 सीओएस वीरता पदक मिले।