केरल में सीपीआई के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने कांग्रेस के यूडीएफ को हराकर एक बार फिर सत्ता में वापसी की है। यूं तो इस गठबंधन ने राज्य की 85 सीटों पर कब्जा जमाया है लेकिन इस जीत में ऐसे कुछ खास चेहरे भी चमके हैं जो आने वाले समय में वाम नेतृत्व को नई ऊर्जा दे सकते हैं।
इन्हीं में से एक हैं मार्क्सवाद के शिखर पुरुष नंबूदरीपाद की सीट से जीत दर्ज करने वाले मोहम्मद मोहसिन। 29 बरस के मोहसिन ने नंबूदरीपाद की पट्टांबी सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और लगातार तीन बार से जीत दर्ज करते आ रहे सीपी मोहम्मद को शिकस्त देकर यहां एक बार फिर वाम झंडा लहरा दिया है।
चुनावों के लिए पार्टी का उम्मीदवार घोषित होने के बाद क्षेत्र में मोहम्मद मोहसिन की एक पहचान और भी बनी, 'कन्हैया के दोस्त' की। असल में मोहसिन चार साल जेएनयू में बिता चुके हैं, जहां उनकी कन्हैया से दोस्ती हुई थी।
देश विरोधी नारों के बीच जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार अचानक सुर्खियों में आए तो लोगों ने उनके दोस्तों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस दोस्ती की कीमत जेएनयू से हजारों किलोमीटर दूर केरल में मोहम्मद मोहसिन को भी चुकानी पड़ी।
सात भाई बहनों में दूसरे नंबर के मोहसिन वैसे तो यहीं पले बढ़े हैं, लेकिन जेएनयू से उठे विवाद के बाद जब लेफ्ट फ्रंट ने उन्हें इस सीट के लिए चुना, तो वह अचानक चर्चा में आ गए।