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47 साल के कलिखो ने तेजी से चढ़ी थीं सत्ता की सीढ़ियां

Tue, 09 Aug 2016 01:28 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल - फोटो : PTI
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अरुणाचल प्रदेश के आठवें मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में आत्महत्या कर ली। उनका शव सीएम आवास में ही पंखे से लटका मिला। उनकी मौत ने न केवल अरुणाचल बल्कि पूरा के सियासी गलियारों को सदमे में डाल दिया है। महज छह महीने तक अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे कलिखो लंबे समय से परेशान चल रहे थे। उनकी मौत के बाद सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर कलिखो कौन थे, और उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा ? तो आइए जानते हैं कलिखो पुल के राजनीतिक जीवन के बारे में।
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कलिखो पुल अरुणाचल के आठवें मुख्यमंत्री थे जिन्होंने 19 फरवरी 2016 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन वह महज छह महीने तक ही अपने पद पर बने रह सके। 13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। इसकी वजह से वह काफी परेशान रहने लगे थे। 

अरुणाचल के अंजा जिले के हवई मुख्यालय के वाल्ला गांव में 20 जुलाई 1969 को जन्मे कलिखो का राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। प्रदेश के हयुलियांग विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले पुल प्रदेश सरकार में सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला। उन्होंने राज्य के तीन मुख्यमंत्रियों गेगांग अपांग, मुकुट मिठी और स्व. दोर्जी खांडू के कार्यकाल में वित्त मंत्री का पदभार संभाला।
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राजनीति सफर रहा संघर्षपूर्ण

कलिखो पुल
कलिखो ने लोहित जिले के इंदिरा गांधी गवर्नमेंट कालेज से मानविकी में स्नातक की उपाधि हासिल की। उनकी शादी डांगविमसई पुल से हुई और उनके पांच बेटे भी हैं। राजनीति में आने से पहले कलिखो का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा।

कलिखो ने लगातार पांच बार अपने विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया और राज्य सरकार के कई अहम मंत्रालयों के कार्यभार भी संभाले जिसमें से ऊर्जा मंत्रालय, वित्त और भूमि-प्रबंधन जैसे मंत्रालय प्रमुख थे। इसके अलावा वह स्वास्थ्य, वित्त एवं योजना, टैक्सेशन, मत्स्य पालन, कानून और न्याय, महिला एवं बाल कल्याण और सामाजिक न्याय मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री भी बनाए गए।

वह 13 सालों तक अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के एक्जीक्यूटिव मेंबर भी रहे और लगभग सात सालों तक प्रदेश चुनाव समिति के सदस्य भी रहे। कलिखो को खेल, भ्रमण और पढ़ने का भी शौक था। इसी साल कांग्रेस से मतभेदों की वजह से बगावत कर बीजेपी के समर्थन से अरुणाचल की सत्ता में काबिज हुए थे। जिसके बाद उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री घोषित किया गया था लेकिन उनका यह कार्यकाल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सका। कलिखो को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2016 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। वह महज छह माह ही अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे।
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