केरल सरकार की रूकी हुई के-रेल परियोजना को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि अगर कुछ मुद्दों को सुलझा लिया जाए तो ये योजना लागू हो सकती है। के-रेल प्रोजेक्ट का उद्देश्य केरल के पूरे उत्तर और दक्षिण खंड में परिवहन को आसान बनाना और यात्रा के समय को वर्तमान में 12 से 14 घंटे के मुकाबले चार घंटे से भी कम करना है।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझा लिया जाए तो केरल सरकार की रुकी हुई के-रेल परियोजना आगे बढ़ सकती है। राज्य सरकार की सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना विपक्ष के विरोध का सामना कर रही है और केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही है। के-रेल का उद्देश्य केरल में यात्रा के समय को काफी कम करना है।
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कुछ समय के लिए स्थगित की गई थी परियोजना
केरल सरकार की महत्वाकांक्षी के-रेल सेमी-हाई-स्पीड रेल परियोजना फिर से चर्चा में है क्योंकि केंद्र ने रविवार को आश्वासन दिया कि अगर राज्य के अधिकारी इसके डिजाइन में तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दों को सुलझा लेते हैं तो परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है। विपक्षी दलों और आम जनता के तीव्र विरोध और केंद्र सरकार से अनुमति न मिलने के कारण कई करोड़ रुपये की यह परियोजना कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई थी।
केरल सरकार की परियोजना को मिली नई उम्मीद
राज्य सरकार की परियोजना को नई उम्मीद देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उन्होंने पिछली बार नई दिल्ली में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से इस मामले पर चर्चा की थी। 'मैंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि के-रेल के डिजाइन में जो भी तकनीकी और पर्यावरणीय मुद्दे हैं, कृपया उनका शीघ्र समाधान करें, ताकि इस परियोजना को भी आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा, क्योंकि हमारी ओर से - एनडीए सरकार - हम सहकारी संघवाद में विश्वास करते हैं।
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राज्य में विपक्षी कर रहे हैं परियोजना का विरोध
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र मूल संरेखण के अनुसार अंगमाली से एरुमेली तक सबरी रेल का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है। वैष्णव ने कहा कि राज्य सरकार ने हाल ही में कुछ शर्तों के साथ केंद्र को एक पत्र भेजा है। उन्होंने कहा, इसलिए, हम बहुत जल्द केरल सरकार को एक प्रारूप भेजेंगे, जैसा कि हमने महाराष्ट्र सरकार के साथ किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक बार जब राज्य के अधिकारी प्रारूप भर देते हैं, तो परियोजना (सबरी रेल) शुरू हो सकती है और आगे बढ़ सकती है। केरल में विपक्षी कांग्रेस और भाजपा सिल्वरलाइन परियोजना का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि इससे उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो इसके कार्यान्वयन के कारण विस्थापित हो जाएंगे।
क्या है केरल सरकार का के-रेल प्रोजेक्ट?
के-रेल प्रोजेक्ट का उद्देश्य केरल के पूरे उत्तर और दक्षिण खंड में परिवहन को आसान बनाना और यात्रा के समय को वर्तमान में 12 से 14 घंटे के मुकाबले चार घंटे से भी कम करना है। ये सिल्वरलाइन तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 530 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और इसे केरल सरकार और रेल मंत्रालय के संयुक्त उद्यम के-रेल की तरफ से विकसित किया जाएगा।