Supreme Court PS Narsimha: ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार पर आधारित एक जागरूकता कार्यशाला में जस्टिस नरसिम्हा ने संबोधन किया। इस दौरान जस्टिस ने कहा कि संसद से कानून पारित होने के बाद न्यायपालिका द्वार अब एक अतिरिक्त कदम लिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.एस नरसिम्हा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में अदालत ने सिर्फ फैसले नहीं सुनाए बल्कि कानूनों को लागू कराने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जस्टिस ने बताया कि कानून संसद बनाती है। इन्ही कानूनों को तोड़ने वाले दोषियों को कोर्ट सिर्फ सजा सुनाती थी। लेकिन मुझे लगता है कि परंपरागत रूप से चली आ रही चीजों में अब बदलाव आया है। पिछले कुछ सालों में कोर्ट के फैसले में बदलाव देखा जा सकता है।
अदालतों ने अब एक सक्रिय कदम उठाए
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ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार पर आधारित एक जागरूकता कार्यशाला में जस्टिस नरसिम्हा ने संबोधन किया। इस दौरान जस्टिस ने कहा कि संसद से कानून पारित होने के बाद न्यायपालिका द्वार अब एक अतिरिक्त कदम लिया जा रहा है। जस्टिस ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि आदेश के रूप में कानून घोषित करने और निर्णय लेने के बजाय अदालतों ने अब एक सक्रिय कदम उठाए हैं। जस्टिस का कहना है कि मैं देख सकता हूं कि अब कैसे कोर्ट यह सुनिश्चित करता है कि कानून लागू हुआ या नहीं। ऐसे ही हम किशोर न्याय के संबंध में भी चीजें सुनिश्चित करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ने कहा कि भारत में न्याय दिलाने में अदालतें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा सहित अन्य न्यायाधीश भी उपस्थित थे। साथ ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा भी उपस्थित थे।