मेरे अभ्यावेदनों पर न तो विचार किया गया, न अस्वीकार
जस्टिस रमण ने कहा, मैंने 19 जुलाई, 2024 को और फिर 28 अगस्त, 2024 को सुप्रीम कोर्ट में औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किए, जिसमें अपनी पत्नी की चिकित्सा स्थिति की गंभीरता को दोहराया था। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, लेकिन इन अभ्यावेदनों पर न तो विचार किया गया और न ही इसे अस्वीकार किया गया। पिछले मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल के दौरान की गई एक अन्य अपील भी अनुत्तरित रही। उन्होंने कहा, मुझे कोई जवाब नहीं मिला। मेरे जैसे न्यायाधीश को कम से कम मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा होती है। मैं निराश और बहुत दुखी हूं।
तबादला करने वाले भी किसी तरह से पीड़ित होंगे
उन्होंने माना कि वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई शायद अधिक सहानुभूतिपूर्ण होते - लेकिन यह बहुत देर से हुआ क्योंकि मैं पद छोड़ रहा हूं। न्यायमूर्ति रमण ने कहा, तबादला मुझे परेशान करने के गलत इरादे से किया गया था। मुझे पीड़ा हुई क्योंकि स्पष्ट कारणों से मेरे गृह राज्य से मुझे स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने अदृश्य शक्तियों का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा। मैं उनके अहंकार को संतुष्ट करके खुश हूं। अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ईश्वर न तो माफ करते हैं और न ही भूलते हैं। वे भी किसी और तरीके से पीड़ित होंगे।
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हर उपलब्धि कठिनाइयों के बाद ही मिली
जस्टिस रमण ने कहा कि न्यायिक सेवा में शामिल होने के क्षण से ही, उन्हें षड्यंत्रकारी जांच का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, मेरे परिवार ने चुपचाप सहा है, लेकिन अंततः सत्य की जीत होती है। उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के शब्दों का हवाला दिया, किसी व्यक्ति को आंकने का पैमाना यह नहीं है कि वह आराम और सुविधा के क्षणों में कहां खड़ा है, बल्कि यह है कि वह चुनौती और विवाद के समय कहां खड़ा है। जस्टिस रमण ने जोर देकर कहा कि उनके जीवन में हर उपलब्धि असफलताओं और कठिनाइयों को सहने के बाद मिली है।
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