सुप्रीम कोर्ट के जज रहे जस्टिस एएम खानविलकर शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए हैं। खानविलकर आधार, पीएमएलए, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश, व्यभिचार के आपराधिक प्रावधान और समलैंगिक यौन संबंध को अपराध मुक्त करने समेत कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे।
गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी और 63 अन्य को क्लीन चिट की पुष्टि
जस्टिस खानविलकर ने उस पीठ की भी अध्यक्षता की थी, जिसने 2002 के दंगों में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 63 अन्य को क्लीन चिट की पुष्टि की थी।
सीजेआई और अन्य जजों का जताया आभार
अपने छह साल से अधिक के कार्यकाल को समाप्त करते हुए जस्टिस खानविलकर ने चीफ जस्टिस एनवी रमण और दो अन्य जजों के साथ औपचारिक पीठ पर बैठे हुए कहा, मैं सभी को प्यार और स्नेह के लिए धन्यवाद कहता हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। भगवान आपका भला करे।
कामकाजी के रूप में जाने जाते थे खानविलकर : सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस खानविलकर को ‘कामकाजी’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्त की आयु (65 वर्ष ) बहुत कम है।
हिमाचल प्रदेश और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में रहे मुख्य न्यायाधीश
गौरतलब है कि जस्टिस खानविलकर को मई 2016 में शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। उनका जन्म 30 जुलाई, 1957 को पुणे में हुआ था और उन्होंने मुंबई के एक लॉ कॉलेज से एलएलबी किया था। उन्हें 4 अप्रैल, 2013 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और बाद में 24 नवंबर, 2013 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
याचिका खारिज करते हुए भी चेहरे पर होती थी मुस्कान
कोविड संक्रमित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वर्चुअल माध्यम से उपस्थित होकर कहा कि अटॉर्नी जनरल भी कोविड -19 संक्रमित हैं। मेहता ने कहा, हम जस्टिस खानविलकर के चेहरे पर मुस्कान को याद करेंगे। हर कोई मेरी इस बात से सहमत होगा कि याचिका खारिज करते हुए भी उनके चेहरे पर मुस्कान रहती थी।
इसे दूसरी पारी मानें न कि सन्यास : हरीश साल्वे
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, जस्टिस खानविलकर को एक सहयोगी के रूप में लगभग चार दशकों से जानना एक सम्मान और खुशी की बात है। मैं केवल एक ही बात कहूंगा कि कृपया इसे दूसरी पारी की शुरुआत मानें न कि ‘संन्यास’।