जांच में पाया गया जो फास्टफूड अभी भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं। उसमें से ज्यादातर भारतीय खाद्य सुरक्षा के मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के तय मानकों से बिलकुल विपरीत है। शीतल-पेय में कीटनाशक, ब्रेड में पोटेशियम ब्रोमेट, शहद और चिकन में एंटीबायोटिक्स बहुतायत में प्रयोग हो रहे हैं। इस अध्ययन में ईएमएल ने 33 लोकप्रिय फास्टफूड्स में नमक, वसा, ट्रांसफैट और कार्बोहाइड्रेट की जांच की। जिसमें चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, और तुरंत बनने वाले सूप के 14 नमूने लिए । इसके अलावा बर्गर, फ्राइज, फ्राइड चिकन, पिज्जा, सैंडविच के नमूने शामिल हैं। इन नमूनों को राजधानी स्थिति सेंटरों से लिया गया जहां से इन्हें पूरे देश में सप्लाई के लिए भेजा जाता है।
टीम सीएसई ने दावा किया कि एक मल्टीग्रेन चिप्स का विज्ञापन एक नामी क्रिकेटर करता है। इसके 30 ग्राम चिप्स में एक ग्राम नमक था जो तय मानकों से काफी ज्यादा था। यानि यह एक दिन के पूरे भोजन के नमक का दोगुना है। हल्दीराम के क्लासिक नट क्रैकर्स में सबसे अधिक नमक है। इंस्टेंट नूडल्स, सूप, मैगी और नॉर के उत्पादों में भी नमक का स्तर ज्यादा पाया गया। इसके अलावा बर्गर किंग, पिज्जा हट, डोमिनोज पिज्जा और सबवे के सैंडविच में ज्यादा वसा, नमक व अन्य तत्व हैं।