वित्त मंत्री ने जताई न्यायपालिका के कामकाज पर चिंता
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर न्यायपालिका के अत्यधिक विस्तार पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने इसे साफ करते हुए कहा कि न्यायपालिका को अपनी लक्ष्मण रेखा स्वयं खींचनी चाहिए और ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिससे कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में कमी आए। उन्होंने सक्रियता के साथ संयम की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के नाम पर बुनियाद ढांचे के अन्य हिस्सों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
भारतीय महिला प्रेस कार्पोरेशन (आईडब्ल्यूपीसी) में साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि न्यायिक समीक्षा न्यायपालिका का अधिकार क्षेत्र है, लेकिन सभी संस्थानों को अपनी खुद की लक्ष्मण रेखा तय करनी चाहिए। यह बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यकारी फैसले कार्यपालिका को ही लेने होंगे, यह काम न्यायपालिका का नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां बहुस्तरीय जवाबदेही है, जिसके तहत कार्यपालिका फैसले लेती है।
वहीं सरकारी और निजी कॉलेजों में मेडिकल कोर्स के दाखिले कि लिए एक ही प्रवेश परीक्षा करवाने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार कोर्ट के निर्णय पर राज्य सरकारों से बात कर रही है। इससे पहले भी जेटली ने इस मामले में कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।जेटली ने कहा कि सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री आज केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलेंगे और शाम में राजनीतिक दल भी इस विषय पर चर्चा के लिए मिलेंगे।जेटली ने कहा कि 'राज्यों का कहना है कि उनके बोर्ड एक समान नहीं है।भाषाएं भी अलग हैं। क्या असमान और अलग-अलग लोगों की प्रतियोगिता एक ही मंच पर राी जा सकती है?' जेटली ने कहा कि 'मुझे लग रहा है कि अब यह मामला विधायिका के क्षेत्र में हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया लेकिन हमें इसे देखना होगा।'