केरल सरकार ने महिला के यौन उत्पीड़न के आरोपी चंद्रन को जमानत देने और जज की टिप्पणियों का विरोध करते हुए हाईकोर्ट से इसे पलटने की अपील की थी। राज्य सरकार ने कहा था कि निचली कोर्ट का आदेश अवैध और त्रुटिपूर्ण है, इसलिए मामले में हाईकोर्ट को दखल देना चाहिए।
कोझीकोड जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एस कृष्णकुमार का तबादला कोल्लम की लेबर कोर्ट में कर दिया गया है। अपने तबादले के आदेश के खिलाफ वे केरल हाईकोर्ट पहुंचे हैं। न्यायाधीश एस कृष्णकुमार ने हाईकोर्ट के प्रशासनिक खंड की ओर से जारी तबादला आदेश के खिलाफ शिकायत की है। गौरतलब है कि न्यायाधीश एस कृष्णकुमार ने यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी सिविक चंद्रन को जमानत देने के साथ ही विवादित टिप्पणी की थी।
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यहां से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 12 अगस्त को यौन उत्पीड़न के एक मामले में सुनवाई करते हुए कोझिकोड सत्र न्यायालय में एस कृष्ण कुमार की पीठ ने कहा था कि जमानत याचिका के साथ पेश की गई तस्वीरों से पता चलता है कि शिकायतकर्ता खुद ऐसे कपड़े पहने हुए थी, जो उत्तेजक थे। इसलिए आरोपी के खिलाफ धारा-354 A का केस नहीं बनता। आरोपी समाज सुधारक है और जातीय व्यवस्था को देखते हुए यह अविश्वसनीय है कि वह अजा महिला को छु भी सकता है। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने यौन उत्पीड़न के एक मामले में लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सिविक चंद्रन को अग्रिम जमानत दे दी थी।
मच गया था बवाल
उनकी टिप्पणियों से देशभर में बवाल मच गया था। केरल सरकार ने महिला के यौन उत्पीड़न के आरोपी चंद्रन को जमानत देने और जज की टिप्पणियों का विरोध करते हुए हाईकोर्ट से इसे पलटने की अपील की थी। राज्य सरकार ने कहा था कि निचली कोर्ट का आदेश अवैध और त्रुटिपूर्ण है, इसलिए मामले में हाईकोर्ट को दखल देना चाहिए।
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हो गया था तबादला
उनकी टिप्पणी के कारण मचे बवाल के बाद बीते मंगलवार को कोझीकोड जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एस कृष्णकुमार का तबादला कोल्लम की लेबर कोर्ट में कर दिया गया था। हाईकोर्ट द्वारा जारी तबादला आदेश में कहा गया था कि ये तबादले नियमित प्रक्रिया के तहत किए गए हैं। दो अन्य जजों के भी तबादले किए गए हैं।