पूर्व अटॉनी जनरल और जज बीएच लोया की मौत से जुड़ी याचिका के मामले में महाराष्ट्र की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने मौत की जांच की मांग वाली याचिकाओं को खास हितों को साधने और सरकारी कामकाज पर हमले की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा, जज की मौत अपने साथियों की उपस्थिति में होने का तथ्य दिखाता है कि इस मामले में कुछ गलत नहीं है। जिस तरह से इस केस में बहस की गई, अवमानना के लिए आदर्श मामला है। इसमें खास हित थे, क्योंकि वे कुछ लोगों पर सामूहिक रूप से हमला करना चाहते थे और इसके लिए जज लोया का इस्तेमाल किया। यह स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व हाईकोर्ट जज और वरिष्ठ वकील अजीत कुमार सिन्हा ने भी रोहतगी से सहमति जताई। सिन्हा ने कहा, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि पहली नजर में इस मामले के जरिए राजनीतिक लक्ष्य साधने की कोशिश नजर आ रही है।