उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है। बीते दिन ही धनखड़ ने राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र भेजकर पद से इस्तीफे की बात कही थी। उन्होंने इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को साफ किया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि वह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू कल शाम जगदीप धनखड़ द्वारा बुलाई गई बीएसी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। यह बैठक उनके पद से इस्तीफा देने से कुछ समय पहले ही होनी थी। नड्डा का यह बयान कांग्रेस नेता जयराम रमेश की ओर से कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) में राज्यसभा के नेता और रिजिजू की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए जाने के बाद आई है।
कांग्रेस के दावों के बाद देनी पड़ी सफाई
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने जयराम रमेश के दावों के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'उपराष्ट्रपति कार्यालय को बैठक में शामिल न हो पाने की हमारी असमर्थता के बारे में सूचित कर दिया गया था।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा नड्डा, रिजिजू, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक के बाद रमेश ने पत्रकारों से बात करते हुए यह दावा किया था।
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स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था
इससे पहले जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया था। उन्होंने कहा था कि वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।
जयराम रमेश का दावा- धनखड़ नाराज हो गए थे
इस बीच कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि धनखड़ के इस्तीफे के पीछे के कारण उनकी की ओर से बताए गए स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से कहीं अधिक गंभीर हैं। रमेश ने दावा किया कि नड्डा और रिजिजू के बीएसी की बैठक में शामिल न होने से धनखड़ नाराज हो गए थे। इससे पहले सोमवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था कि उपराष्ट्रपति धनखड़ का इस्तीफा जितना हैरान करने वाला है, उतना ही अकल्पनीय भी। मैं शाम 5 बजे तक उनके साथ था, शाम 7:30 बजे फोन पर बात की थी। इसमें संदेह नहीं कि धनखड़ को अपनी सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, लेकिन स्पष्ट रूप से उनके अप्रत्याशित इस्तीफे में जो दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है। उन्होंने मंगलवार दोपहर एक बजे कार्य मंत्रणा समिति की बैठक तय की थी। उन्हें न्यायपालिका से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं भी करनी थीं। हम उनसे पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री उन्हें विचार बदलने के लिए मना लेंगे। यह राष्ट्रहित में होगा।