रेलवे के इंजीनियरों ने 1914 में तैयार जॉन मोरिस एजेक्स फायर इंजन को फिर से दौड़ने के लिए सक्षम बना लिया है। छुक-छुक रेलगाड़ी के इस इंजन को पांच साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से चलने योग्य बनाया गया है। इस ट्रेन को चाणक्यपुरी स्थित रेल म्यूजियम में प्रदर्शित भी किया गया है।
रेलवे बोर्ड के सदस्य (रोलिंग स्टॉक) राजेश अग्रवाल ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारतीय रेलवे ने भाप इंजन से लेकर ट्रेन 18 तक का सफर तय कर लिया है। आने वाले दिनों में भारत बुलेट ट्रेन भी पूरी रफ्तार से चलाने में सक्षम होगा। विकास के काम के साथ धरोहर को भी सहेज रहा है।
सौ साल का सफर करने के बाद जॉन मोरिस एजेक्स फायर इंजन को 2014 में सेवा मुक्त कर दिया गया था। इसे 1914 में यूके की कंपनी जॉन मोरिस ने तैयार किया था। हैदराबाद के निजाम ने इसे आग बुझाने के लिए मंगाया था। विंटेज कार रैली में इस फायर इंजन ने 50 किमी की दूरी तय कर सबको अचंभे में डाल दिया। दक्षिण मध्य रेलवे की ललगुडा वर्कशॉप में इसकी मरम्मत का काम किया जाता है।