मध्य प्रदेश में भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के दावे करने वाली कांग्रेस को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव 2023 की मतगणना जारी है। मतगणना शुरू होने के सात घंटे से अधिक समय बीतने के बाद चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस के सितारे गर्दिश में दिख रहे हैं। 14 दौर की मतगणना के बाद राहुल गांधी के करीबी नेता जीतू पटवारी 17,900 से अधिक वोटों से पिछड़ रहे हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि इन शुरुआती आंकड़ों में बड़े फेरबदल की संभावना नगण्य है। ऐसे में अगर अंतिम परिणाम में भी जीतू को मात मिली, तो कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा।
भाजपा के मधु वर्मा बड़ी जीत की तरफ
बता दें कि मध्य प्रदेश में जब कांग्रेस नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे तो जीतू को युवा और खेल मामलों का मंत्री बनाया गया था। जीतू पटवारी को अगली पीढ़ी का नेता और कमलनाथ के बाद उभरता विकल्प माना जा रहा था, लेकिन उनकी खिसकती राजनीतिक जमीन कांग्रेस पार्टी के लिए तगड़ा झटका मानी जा रही है। जीतू पटवारी इंदौर के समृद्ध किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। जीतू की तय मानी जा रही हार को भाजपा भी अपनी बड़ी सफलता के तौर पर पेश कर सकती है। तीन बजे तक 14 दौर की मतगणना के बाद जीतू को चुनौती दे रहे भाजपा के मधु वर्मा को 90 हजार 600 से अधिक वोट मिले हैं।
मंदसौर के आंदोलन से मिली पहचान
करीब छह साल पहले मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों का आंदोलन जीतू के लिए बड़ा लॉन्च पैड बना। 2017 की इस घटना में किसानों पर पुलिस की गोली चलना और जीतू का कांग्रेस की तरफ से आवाज बुलंद करना मीडिया की सुर्खियां बना। मध्य प्रदेश कांग्रेस में मीडिया सेल के प्रभारी रह चुके जीतू पटवारी एमपी कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सचिव रह चुके जीतू युवा कांग्रेस इकाई में जिला और प्रदेश अध्यक्ष का पदभार भी संभाल चुके हैं।
राहुल के करीबी जीतू पटवारी, कांग्रेस में मिली बड़ी जिम्मेदारियां
2023 के चुनाव में कांग्रेस ने जीतू पटवारी को चुनाव प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया। संगठन संभालने में जीतू का अनुभव भी उन्हें बाकी नेताओं से आगे करता है। इंदौर की राऊ विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस की आक्रोश यात्रा के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान पर तीखे जुबानी वार किए थे। मालवा इलाके में जीतू पटवारी कांग्रेस के अभियान की कमान संभाल रहे थे।
- पटवारी का परिवार कांग्रेस के अलावा ब्रिटिश हुकूमत से आजादी के संघर्ष में भी शामिल रहा।
- इंदौर के कस्बे में नवंबर, 1973 में जन्मे जीतू पटवारी ने कानून की पढ़ाई कर LLB की डिग्री भी हासिल की।
- सियासी परिवार से आने के कारण कम उम्र में राजनीति शुरू करने वाले पटवारी 2013 में केवल 40 साल की आयु में पहली बार विधायक बने।
- मंदसौर में किसानों पर गोली चलने की घटना से पहले बार राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आए।
- प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद जीतू पटवारी ने राहुल गांधी को खुद बाइक पर बिठाकर यात्रा कराई।
- मंदसौर में पीड़ित किसान परिवारों से राहुल गांधी को मिलवाने जीतू पटवारी बाइक चलाकर ले गए।
- मध्य प्रदेश पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहे पटवारी और राहुल गांधी की बाइक वाली तस्वीर पर आज भी चर्चा होती है।
क्या कांग्रेस के सितारे गर्दिश में?
फायरब्रांड युवा नेता की छवि रखने वाले जीतू पटवारी कुछ साल पहले राहुल गांधी के साथ एक समय बाइक पर सवार होकर ट्रैवल करते देखे गए थे। पुलिस के साथ नोकझोंक के बावजूद जीतू पीछे नहीं हटे। इस कदर कांग्रेस आलाकमान के नजदीक होना भी उनके स्टार कांग्रेस नेता होने की तस्दीक करता है। कांग्रेस को जब 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सफलता मिली तो जीतू पटवारी कमलनाथ की कैबिनेट में मंत्री बनाए गए और उनका राजनीतिक कद बड़ा होता गया। हालांकि, छह साल में सियासी तस्वीर बदली, कांग्रेस के सितारे गर्दिश में चले गए। अब निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है।