कैंपियरगंज में पहुंचकर पुरानी यादें ताजा करती जेनिफर
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अंग्रेज अफसर विलियम कैंपेयर की पोती जेनिफर इन दिनों शहर में हैं। कैंपियरगंज क्षेत्र के नेतवर में दादा की विरासत देखने और शहर के पैडलेगंज ग्रेवयार्ड में मौजूद उनकी कब्र पर फूल चढ़ाने पहुंचीं जेनिफर ने हर उस स्थान को न केवल शिद्दत से देखा बल्कि उनकी यादों को सजो लेने के लिए बेचैन भी दिखीं। बचपन के आशियाने की झलक ने जहां उन्हें भावुक किया वहीं दुर्दशा ने आहत। जेनिफर के दादा के नाम पर ही कैंपियरगंज का नाम पड़ा है।
शहर के इलाहीबाग के रहने वाले शैलेंद्र श्रीवास्तव के घर ठहरीं जेनिफर ने बताया कि उनका पूरा कुनबा ब्रिटिश काल में कैंपियरगंज के नेतवर में रहता था। ऐसा दादा विलियम कैंपेयर की वहां बतौर अफसर तैनाती की वजह से था।
आजादी के बाद 13 साल की उम्र में वे अपने माता-पिता के साथ ब्रिटेन तो चली गईं लेकिन अपनी जन्मभूमि की यादें उन्हें हमेशा कचोटती रहीं। वकालत का पेशा छोड़ने के बाद जब उन्हें एक बार फिर भारत आने का मौका मिला तो सन् 2000 में नैनीताल आना हुआ।