सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और आईआईटी मद्रास से पूछा है कि आईआईटी-जेईई परीक्षा में उन छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने ‘गलत प्रश्नों’ को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। हालांकि शीर्ष अदालत ने आईआईटी में दाखिले को लेकर चल रही काउंसिलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस बार प्रवेश परीक्षा कराने की जिम्मेदारी आईआईटी मद्रास को दी गई थी।
न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अवकाशकालीन पीठ ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय और आईआईटी मद्रास से पूछा है कि प्रवेश परीक्षा में ऐसे छात्रों को बोनस अंक क्यों दिए गए, जिन्होंने गलत छपे प्रश्नों को हल करने का प्रयास ही नहीं किया। दोनों को एक हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा गया है। शीर्ष अदालत ऐश्वर्या अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
छात्रा ने आईआईटी-जेईई परीक्षा में ग्रेस मार्क्स देने को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा में शामिल सभी छात्रों को गलत प्रश्नों के एवज में बोनस अंक दिए गए। गौरतलब है कि गलत प्रश्नों के एवज में आईआईटी मद्रास ने सभी छात्रों को 18 अंक दिए थे।