बिहार में सत्तारूढ़ जदयू और राजद के बीच बयानबाजी तीखी होती जा रही है। शुक्रवार को राजद के तीन नेताओं तस्लीमुद्दीन, प्रभुनाथ सिंह और रघुवंश सिंह ने राज्य में बढ़ते अपराध को लेकर नीतीश पर हमला बोला था।
तस्लीमुद्दीन ने शनिवार को हमला और तेज कर दिया। उन्होंने नीतीश पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सही तरीके से राज्य की विधि-व्यवस्था नहीं देख पा रहे हैं। जब वह राज्य ही सही से नहीं चला पा रहे हैं तो देश का नेतृत्व क्या करेंगे। नीतीश को अगर राज्य नहीं देखना है तो मुख्यमंत्री का पद छोड़ दें। हालांकि जदयू ने इस हमले का करारा जवाब दिया।
राज्य के पूर्व मंत्री और जदयू नेता श्याम रजक ने नीतीश की आलोचना करने वाले तीनों नेताओं को हताशा से भरा शख्स बताया है। जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने राजद से तीनों नेताओं पर कार्रवाई करने की मांग की है। हालांकि बयानबाजी पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अब तक खामोश हैं।
राजद के कुछ लोग बस बोल-बोल कर अपना समय बर्बाद कर रहे: रजक
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श्याम रजक ने कहा कि नीतीश कुमार की क्षमता पर सवाल उठाने वाले राजद नेताओं को पहले अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजद का मतलब है लालू प्रसाद यादव, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी। अगर इन तीनों ने सीएम पर कोई टिप्पणी नहीं की है तो अन्य की टिप्पणी का कोई निहितार्थ नहीं है।
रजक ने राजद के रघुवंश सिंह को नेता मानने से भी इनकार किया और कहा कि राजद के कुछ लोग बस बोल-बोल कर अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश अपनों के ही निशाने पर हैं। गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के तीन कद्दावर नेताओं ने नीतीश पर एक साथ वार किया है। विपक्ष का आरोप है कि महागठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। जानकारों की मानें तो राजद की अंदरूनी राजनीति का प्रभाव गठबंधन पर पड़ता दिख रहा है।
इस बयानबाजी के पीछे आगामी राज्यसभा व विधान परिषद के चुनाव में दावेदारी के लिए लालू प्रसाद पर दबाव बनाने की रणनीति है। उल्लेखनीय है कि रघुवंश, प्रभुनाथ और तस्लीमुद्दीन जैसे नेता गठबंधन में रहते हुए भी अब तक सत्ता और शक्ति से दूर हैं। रघुवंश ने तो यहां तक कहा है कि गठबंधन चंद नेताओं के बीच हुआ है न कि दो पार्टियों के बीच। वैसे रघुवंश के इस बयान को राजद नेता तेजस्वी यादव ने सिरे से खारिज करते हुए इसे निजी बयान बताया है।