राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार प्रबंधन के नंबर एक ब्रांड और नरेंद्र मोदी से लेकर नीतीश कुमार, कांग्रेस, अमरिंदर सिंह, जगन रेड्डी तक के लिए चुनाव अभियान की कमान संभाल चुके प्रशांत किशोर इन दिनों नागरिकता संशोधन कानून-2019 (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में किसी भी राजनेता से कहीं ज्यादा मुखर हैं। इस मुद्दे को लेकर प्रशांत किशोर यानी पीके एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका निभाने जा रहे हैं।
उनकी कोशिश है कि देश के सभी गैर भाजपा शासित दल और राज्यों की सरकारें सीएए और एनआरसी के विरोध में खुलकर सामने आएं। वह इसके लिए सभी विपक्षी दलों के नेताओं और मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे हैं। संसद में सीएबी का समर्थन करने वाले नीतीश कुमार को पीके ने एनआरसी के विरोध के लिए राजी कर लिया है। ममता बनर्जी, एम.के.स्टालिन, अरविंद केजरीवाल पहले से ही इसके विरोध में हैं।
प्रशांत पहले अपने दल जनता दल (यू) के संसद में सीएबी को समर्थन देने पर भी अपना एतराज जताते हुए न सिर्फ विरोध कर चुके हैं, बल्कि इसके बाद उन्होंने नीतीश कुमार को भी एनआरसी का विरोध करने के लिए राजी कर लिया। प्रशांत किशोर ने ताजा मोर्चा इस मुद्दे पर कांग्रेस की महज सांकेतिक और खानापूरी की राजनीति के खिलाफ खोला है।
प्रशांत किशोर का कहना है कि कांग्रेस को महज खानापूरी करने की बजाय खुल कर एलान करना चाहिए कि जिन पांच राज्यों में उसकी सरकारें हैं, वहां एनआरसी लागू नहीं किया जाएगा। एनआरसी और सीएए के विरोध में खुद को बताने वाली कांग्रेस अभी तक इससे क्यों बच रही है।
प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक वीडियो बयान का संदर्भ देते हुए शनिवार को एक ट्वीट करके कहा है कि नागरिक अधिकारों के लिए सीएए और एनआरसी के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों में कांग्रेस सड़कों पर नहीं है और उसका नेतृत्व भी इसमें व्यापक रूप से अनुपस्थित है। पार्टी कम से कम इतना तो कर सकती है कि सारे कांग्रेसी मुख्यमंत्री उन मुख्यमंत्रियों के साथ शामिल हों, जिन्होंने कहा है कि वो अपने राज्यों में एनआरसी लागू नहीं होने देंगे। अन्यथा ऐसे (सोनिया गांधी के वीडियो बयान) बयानों का कोई मतलब नहीं है।
इस ट्वीट के बाद अमर उजाला से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस देश का मुख्य विपक्षी दल है, इसलिए उसकी भूमिका सबसे बड़ी होनी चाहिए। यह सही है कि संसद में कांग्रेस के पास ज्यादा संख्याबल नहीं है, लेकिन पांच राज्यों पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, और पुद्दूचेरी में उसकी सरकार है और महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार में साझीदार है।