नेहरू की चिट्ठियों पर क्या है विवाद: सोनिया गांधी ने दान के 26 साल बाद क्यों वापस लिए पत्र? जानें पूरा मामला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 16 Dec 2024 05:37 PM IST
सार
मामले में यह जानना अहम है कि आखिर जवाहरलाल नेहरू की चिट्ठियों को लेकर यह विवाद कब से जारी है और अब फिर यह मामला क्यों उठा? इन चिट्ठियों को किसे लिखा गया था? इन्हें कब दान किया गया और 2008 में किस वजह से इन चिट्ठियों को सोनिया गांधी को सौंप दिया गया था और इन पत्रों की संख्या कितनी है? आइये जानते हैं...
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने आधिकारिक तौर पर राहुल गांधी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के उन पत्रों को वापस करने की मांग की है, जिन्हें 2008 में नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) की तरफ से सोनिया गांधी को भेजा गया था।
बता दें कि 2023 में इसी नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय रखा गया। इस मुद्दे पर सोमवार को भाजपा ने भी गांधी परिवार पर निशाना साधा और पूछा कि आखिर उन चिट्ठियों में ऐसा क्या है, जो कांग्रेस देश को नहीं बताना चाहती।
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जवाहर लाल नेहरू की चिट्ठियों को लेकर हुए घटनाक्रम।
- फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने आधिकारिक तौर पर राहुल गांधी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के उन पत्रों को वापस करने की मांग की है, जिन्हें 2008 में नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय (एनएमएमएल) की तरफ से सोनिया गांधी को भेजा गया था।
बता दें कि 2023 में इसी नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय का नाम बदलकर प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय रखा गया। इस मुद्दे पर सोमवार को भाजपा ने भी गांधी परिवार पर निशाना साधा और पूछा कि आखिर उन चिट्ठियों में ऐसा क्या है, जो कांग्रेस देश को नहीं बताना चाहती।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जवाहरलाल नेहरू की चिट्ठियों को लेकर यह विवाद कबसे जारी है और अब फिर यह मामला क्यों उठा? इन चिट्ठियों को किसे लिखा गया था? इन्हें कब दान किया गया और 2008 में किस वजह से इन चिट्ठियों को सोनिया गांधी को सौंप दिया गया था और इन पत्रों की संख्या कितनी है? इससे पहले कब-कब देश के पहले पीएम की चिट्ठियों के खुलासे की मांग कब-कब की गई? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्या है ताजा मामला?
प्रधानमंत्रियों के संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) ने औपचारिक रूप से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखे गए व्यक्तिगत पत्रों को वापस करने का अनुरोध किया है, जो 2008 में यूपीए शासन के दौरान सोनिया गांधी को भेजे गए थे। 10 दिसंबर को लिखे एक पत्र में पीएमएमएल सदस्य रिजवान कादरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे सोनिया गांधी से मूल पत्रों को दोबारा वापस लेने या फोटोकॉपी या डिजिटल कॉपी देने का अनुरोध किया है। सितंबर में सोनिया गांधी से भी कुछ इसी तरह का अनुरोध किया गया था।
इंदिरा गांधी। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
देश को कैसे हुई नेहरू के इन पत्रों की जानकारी?
पंडित नेहरू के ये निजी पत्र बेहद ऐतिहासिक माने जाते हैं। पहले इन पत्रों का हक जवाहरलाल नेहरू स्मारक फंड के पास था। इस स्मारक फंड का मालिकाना हक नेहरू परिवार के ही किसी वारिस के पास रहना तय है। साल 1971 में जब इंदिरा गांधी इस स्मारक फंड की कानूनी मालिक बनीं, तब उन्होंने इन पत्रों को देश के पहले प्रधानमंत्री की विरासत के यादगार के तौर पर बने नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय को दान करना शुरू कर दिया।
फरवरी 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) सोसायटी की बैठक में सामने आया कि 1982 में इंदिरा के अंतर्गत आने वाले नेहरू स्मारक फंड ने एनएमएमएल को सूचित किया था कि नेहरू के पत्र सीधे तोहफा होने के बजाय सुरक्षित रखने के मकसद से उसे दिए गए हैं। यानी इनकी गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है।
सोनिया गांधी।
- फोटो : Facebook
सोनिया गांधी ने भी दान किए थे नेहरू से जुड़े दस्तावेज
1984 में इंदिरा गांधी के निधन के बाद जब नेहरू स्मारक फंड का मालिकाना हक सोनिया गांधी के पास आ गया तब 1988 में उन्होंने भी नेहरू से जुड़े कई दस्तावेजों को एनएमएमएल को दान करने का निर्णय लिया। इन पत्रों को दान करने के साथ नेहरू स्मारक फंड ने शर्त रखी थी कि इनके बारे में कोई भी जानकारी या खुलासे बिना नेहरू परिवार के वारिस की मर्जी के बिना नहीं किए जाएंगे। 16 मार्च 1988 के बाद से यह नियम रहा कि भले ही यह चिट्ठियां नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय के पास रहें, लेकिन इनका खुलासा बिना सोनिया गांधी के लिखित आदेश के नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं अगर सोनिया गांधी इसकी अनुमति दे देती हैं तो भी पत्र की सामग्री के खुलासे के लिए देश की सरकार की इजाजत की आवश्यकता होगी।
बताया जाता है कि 1992 में सोनिया गांधी ने एनएमएमएल को सूचित किया कि पीएम नेहरू की चिट्ठियों में कई आधिकारिक दस्तावेजों के अलावा उनके निजी पत्र भी शामिल हैं। इसलिए इनके खुलासों के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता की शर्त रख दी गई। इस तरह अगले कई वर्षों तक पीएम नेहरू की इन चिट्ठियों की सामग्री जनता से दूर रही।
नेहरू की इन चिट्ठियों में क्या खास?
बताया जाता है कि पंडित नेहरू की जिन दस्तावेजों को संग्रहित कर के रखा गया था, उनमें उनके और एडविना माउंटबेटन (लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी), अल्बर्ट आइंस्टीन, जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, विजय लक्ष्मी पंडित, अरुणा आसफ अली, बाबू जगजीवन राम और गोविंद वल्लभ पंत आदि महान विभूतियों के बीच हुई बातचीत और पत्राचार शामिल हैं।
सोनिया गांधी के पास कैसे पहुंच गए ये पत्र?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2008 में सोनिया गांधी ने अपने प्रतिनिधि एमवी राजन को भेजकर पूर्व पीएम नेहरू के दस्तावेजों की छंटाई शुरू करवाई। इसके तहत उनके आधिकारिक पत्र और निजी पत्रों को अलग किया जाना था। राजन और एनएमएमएल कर्मियों की तरफ से की गई इस छंटाई के बाद नेहरू के निजी दस्तावेजों को अलग कर 5 मई 2008 को 51 कार्टन बक्सों में भरकर सोनिया गांधी को भेज दिया गया।
नेहरू-गांधी परिवार
- फोटो : AMAR UJALA
सोनिया गांधी से पहले भी हो चुकी है नेहरू के इन पत्रों तक पहुंच की मांग
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय के सदस्य रिजवान कादरी वह पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर इन पत्रों के खुलासे की मांग की है। इससे पहले 2014 में एक व्यक्ति ने ऐसी ही मांग को लेकर उन्हें पत्र लिखा था। हालांकि, तब सोनिया गांधी ने कहा था कि इन चिट्ठियों तक पहुंच के लिए उनकी इजाजत की जरूरत नहीं है, क्योंकि एनएमएमएल का संग्रह सरकार के अंतर्गत आता है। बाद में सोनिया ने बताया कि उनकी इजाजत की जरूरत सिर्फ उन दस्तावेजों के लिए है, जो कि नेहरू के 1947 से 1964 के बीच लिखे गए निजी पत्र हैं।
प्रधानमंत्री संग्रहालय के पास रखे दस्तावेजों का मालिक कौन?
प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय, जो कि 2016 में नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय के नाम से जाना जाता था, उसका प्रशासनिक नियंत्रण संस्कृति मंत्रालय के पास रहा है। इसमें रखी नेहरू की चिट्ठियों के खुलासे को लेकर जब सवाल उठा तो मंत्रालय ने कहा कि एनएमएमएल सिर्फ इन दस्तावेजों के रखरखाव और कस्टडी का काम करता है। इन दस्तावेजों का मालिकाना हक इसके दानकर्ता यानी सोनिया गांधी के पास है।
हालांकि, सोनिया गांधी के 2014 में दिए गए पत्र के आधार पर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि अगर किसी को नेहरू स्मारक और संग्रहालय में रखे पहले प्रधानमंत्री से जुड़े दस्तावेज चाहिए तो उन्हें संस्कृति मंत्रालय को ही चिट्ठी लिखकर इसका अनुरोध करना होगा। 2022 में दस्तावेजों तक पहुंच के लिए अनुमति देने का अधिकार मंत्रालय की जगह एनएमएमएल के निदेशक को ही दे दिया गया।
अब सोनिया गांधी से क्यों की गई नेहरू की चिट्ठियां सौंपने की मांग?
प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) सोसाइटी के सदस्य रिजवान कादरी ने इससे पहले सितंबर में सोनिया गांधी को भी पत्र लिखा था। रिजवान कादरी लंबे समय से इस मुद्दे पर मुखर रहे हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तीन मूर्ति भवन में रहते थे। उनके निधन के बाद तीन मूर्ति भवन को नेहरू मेमोरिल बना दिया गया था, जो आज प्रधानमंत्री स्मारक संग्रहालय और लाइब्रेरी में परिवर्तित कर दिया गया है। इस स्मारक में पुस्तकों और दुर्लभ अभिलेखों का समृद्ध संग्रह है।
पंडित नेहरू के निजी कागजात से संबंधित अभिलेखों में कथित '51 बक्से' सोनिया गांधी द्वारा मंगवाए गए थे। सितंबर में सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कादरी ने लिखा था कि, 'पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके पिता पंडित मोतीलाल नेहरू महत्वपूर्ण अभिलेख छोड़ गए हैं, जो सौभाग्य से नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय में संरक्षित हैं। राष्ट्र निर्माण में उनके अपार योगदान के लिए गहन वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है, जिसके लिए संपूर्ण अभिलेखों तक पहुंच आवश्यक है।' पत्र में, कादरी ने इस बात पर जोर दिया कि 'जवाहरलाल नेहरू जी अपने योगदान के बारे में किसी भी राजनीतिक प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष शोध के हकदार हैं।'