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जाटों की नाराजगी को थामने खुद मोर्चे पर उतरे शाह

Wed, 08 Feb 2017 04:47 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमित शाह (फाइल फोटो)
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पश्चिमी यूपी के चुनावी मैदान से मिल रहे जाट समाज की नाराजगी के संकेतों ने भाजपा आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। जाटों की नाराजगी पार्टी के अरमानों पर पानी फेरे इससे पहले भाजपा आलाकमान सक्त्रिस्य हो गया है। पार्टी से नाराज चल रहे जाट समुदाय के लोगों को थामने के मोर्चे पर खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उतर आए हैं। 
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मंगलवार देर शाम अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री चौ बीरेंद्र सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर पार्टी और जाट समाज के प्रमुख नेताओं संग मंत्रणा बैठक की। बैठक में शाह ने जाट नेताओं से कहा कि केंद्र सरकार से लेकर टिकट के बंटवारे तक में जाट बिरादरी को तरजीह दी गई है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र में जाट बिरादरी के 4 मंत्री हैं। तो इस बिरादरी के 12 लोगों को पार्टी ने टिकट दिया है। जाटों की समस्या को दूर करने के लिए शाह ने केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान के नेत्रत्व में एक 5 सदस्यीय समिति का भी गठन किया। लेकिन शाह की इस कवायद के बावजूद भी जाट समाज के तेवर नरम पडते नहीं दिख रहे हैं। 
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सूत्र बताते हैं कि शाह की बुलाई इस बैठक में पुराने समय से पार्टी में जुडे जाट नेता नदारद रहे। तो जाट आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले जाट नेता यशपाल मलिक का कहना है कि अब शाह और पीएम मोदी की बैठकों से कुछ होने वाला नहीं है। गुरूवार को मेरठ में कार्यक्त्रस्म कर वे भाजपा को धूल चटाने के लिए जनता से सरेआम अपील करेंगे।
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जाट समाज के बीच हरियाणा के जाट आंदोलन के अंजाम से नाराजगी

- फोटो : amar ujala
सूत्र बताते हैं कि जाटों को साधने के लिए बीरेंद्र सिंह के निवास पर हुई बैठक में शाह के अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान, सांसद सतपाल सिंह, बाबू लाल,भारतेंदू सिंह,हरियाणा सरकार के मंत्री कैप्टन अभिमन्यू, ओम प्रकाश धनकड और जाट समाज के महामंत्री युदृधवीर भी उपस्थित थे। बताया जा रहा है कि बालियान के साथ 5 सदस्यीय समिति में अभिमन्यू और धनकड के साथ शाह ने युदृध्वीर को भी इसमें रखा है।

दरअसल भाजपा आलाकमान की चिंता की वजह यह है कि लोकसभा चुनाव 2014 में पार्टी की जीत के मजबूत आधार रहे जाट समाज के बीच हरियाणा के जाट आंदोलन के अंजाम से नाराजगी है। अभी ये नारागजी पूरी तरह खत्म भी नहीं हो पाई है कि यूपी विधानासभा चुनाव के ऐन मौके पर हरियाणा में दोबारा से जाट आरक्षण आंदोलन की आग सूलगने लगी है। 

यही वजह है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को खुद मोर्चे पर उतरना पडा है। मगर उनकी मुश्किल यह है कि पार्टी में पुराने समय से जुडे जाट नेता उनकी रणनीति से नदारद हैं। जिन नेताओं के जरिए वे यूपी के जाट समाज को साधने की कवायद में हैं यो तो वे बाहरी हैं अथवा उनकी यूपी के जाट समुदाय पर पकड नहीं है। दारकिनार किए जाने से पार्टी के पुराने वफादार जाट नेता या तो मौन हैं अथवा चुनावी चहलकदमी में हासिए पर हैं।
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