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जन औषधि: यहां मिलती हैं दुनिया की सबसे सस्ती दवाएं, योजना यही कि देश के हर ग्राम पंचायत में खुलें दुकानें

आशीष तिवारी
Updated Sun, 17 Sep 2023 03:22 PM IST

सार

Jan Aaushdhi: अपने देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र पर मिलती हैं यह सबसे सस्ती दवाएं। अब जल्द होगा पीएम जन औषधि के केंद्र का बड़ा बाजार। स्वास्थ्य  मंत्रालय ने तैयार की यह बड़ी योजना। 95 फीसदी तक सस्ती मिलती है दवाएं।
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जन औषधि केंद्र - फोटो : अमर उजाला


पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से बढ़ेगा जन औषधि केंद्र का कारवां

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के मुताबिक आने वाले समय में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से देश के सभी राज्यों के जिलों, शहरों, कस्बों और ग्राम पंचायत के स्तर पर खोले जाने की तैयारिया शुरू कर दी गई हैं। देश में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदार संस्था फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ़ इंडिया (पीएमबीआई) के सीईओ रवि दाधीच कहते हैं कि अभी भी देश में लोगों की सहभागिता के साथ ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र को आगे बढ़ाया जा रहा है। वह बताते हैं कि इस वक्त देश में 9800 से ज्यादा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र अलग-अलग राज्यों में चल रहे हैं। उनका कहना है कि जिस तरह से समूचे देश में यह केंद्र खुल रहे हैं उससे अनुमान यही लगाया जा रहा है कि 2 अक्टूबर तक देश में दस हजार प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुल जाएंगे। रवि दाधीच कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से अगले तीन साल के भीतर 25 हजार जन औषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा है उसको वह तय समय में हासिल भी कर लेंगे। वह कहते हैं कि आने वाले कुछ सालों में दुनिया की सबसे सस्ती मिलने वाली दवाएं देश के प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग-अलग माध्यमों से जन औषधि केंद्र पर मिलेंगी। 


लगातार बढ़ता जा रहा है प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का बाजार

पीएमबीआइ के आंकड़ों के मुताबिक देश में जन औषधि केंद्र पर बिकने वाली दवाओं का बाजार भी लगातार बड़ा होता जा रहा है। संस्था के सीईओ रवी दाधीच बताते हैं कि बीते कुछ वित्त वर्षों में लगातार यह ग्राफ बढ़ा है। 2021-22 में जहां समूचे देश में 900 करोड़ रुपए की दवाएं  जनऔषधि केंद्र से बिकी। वही 2022- 23 में समूचे देश में जनऔषधि केंद्र का यह आंकड़ा 1200 करोड रुपए से ज्यादा पहुंच गया। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों और जन औषधि केंद्र को विस्तार देने वाली संस्थाओं से जुड़े जिम्मेदारों का मानना है कि आने अगले वित्त वर्ष की समाप्ति तक यह आंकड़ा 30 फ़ीसदी के लिहाज से 1600 करोड रुपए से ज्यादा का हो सकता है। रवि दाधीच बताते हैं कि देशभर में उनके तकरीबन 9800 जन औषधि केंद्रों पर रोजाना 10 लाख लोग दवाएं लेने पहुंच रहे हैं। इस संख्या के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विभाग में प्रधानमंत्री के निर्देश पर तीन साल के भीतर 25000 जन औषधि केंद्र शुरू करने की व्यापक रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इस कड़ी में गुजरात रेड क्रॉस सोसाइटी में  रविवार को प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर 73 नए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने का करार किया है। 


उत्तर प्रदेश में है सबसे ज्यादा जन औषधि केंद्र

पीएमबीआई की आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र उत्तर प्रदेश में चल रहे हैं। दूसरे नंबर पर केरल और कर्नाटक की बारी आती है। पीएमबीआई के सीईओ रवी दाधीच बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में 1500 के करीब प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुले हैं। केरल में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की संख्या 1000 और कर्नाटक में भी इतनी ही संख्या जन औषधि केंद्रों की है। महाराष्ट्र में 600 और पश्चिम बंगाल में जन औषधि केंद्रों की संख्या 400 के करीब पहुंच गई। रवि दाधीच कहते हैं कि धीरे-धीरे देश के सभी राज्यों में जन औषधि केंद्रों की संख्या को बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि समूचे देश में इस वक्त 9 लाख दावा की दुकान देश के अलग अलग राज्यों में रजिस्टर्ड है। जबकि जन औषधि केंद्र की दस हजार दुकाने अक्टूबर में होने वाली हैं। उनका कहना है कि अगर आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पता चलता है कि 2014 से लेकर अब तक जन औषधि केंद्र के माध्यम से 23000 करोड रुपए उन लोगों के बचाए गए हैं जो लोग जन औषधि केंद्र से दवाएं लेकर जाते हैं।


WHO प्रमाणित होती है सभी दवाएं

रवि दाधीच कहते हैं कि लोगों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि जन औषधि केंद्र पर जो दवाएं मिलती हैं वह बिलकुल वही दवाएं होती है जो अन्य केमिस्ट शॉप पर उपलब्ध होती है। उनका कहना है कि जन औषधि केंद्र पर मिलने वाली दवाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाणित होती है। जो दवाएं उनकी ओर से तैयार कराई जाती हैं उनकी गुणवत्ता और उसको जांचने की प्रक्रिया देश में बिकने वाली दवाओं के स्टैंडर्ड के मुताबिक ही होती है। वह कहते हैं कि दो महत्वपूर्ण चरणों के बाद ही जन औषधि केंद्र पर दवाएं पहुंचाई जाती हैं। जिसमें पहले स्वास्थ्य संगठन और जीएमटी प्रमाणित दवाओं का होना शामिल होता है। उसके बाद इन दवाओं का एनएबीएल लैब से टेस्ट होता है। वह कहते हैं कि यही वह दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं होती हैं जो जन औषधि केंद्र से लेकर केमिस्ट शॉप पर मिलने वाली दवाओं की भी होती हैं। 


दवाओं की कीमत में इतना भारी अंतर होता है

कैल्शियम की जिस दवा को आप मेडिकल स्टोर पर जाकर सवा सौ रुपए से ज्यादा की कीमत देकर खरीदने हैं वही दवा आपको प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर साढ़े सात रुपए में मिल जाती है। ब्लड प्रेशर की जिस दस  टैबलेट के लिए आप बाजार में सौ रुपए तक खर्च जो करते करते हैं वही दवा आपको इस जन औषधि केंद्र पर महज सात रुपए में ही मिल जाती है। इसी तरह डायबिटीज की दस टैबलेट के लिए आप बाजार में जिसके 65 देते हैं वही दवा आपको जन औषधि केंद्र पर साढे पांच में उपलब्ध होती है। पेट में बनने वाली गैस की जो दवा आप सामान्य मेडिकल स्टोर पर जाकर 100 रुपए में 10 टैबलेट लाते हैं वही जन औषधि केंद्र पर महज 12 रुपए में मिलती हैं। एंटी डायबिटिक मेटाफार्मिंग साल्ट की दस टैबलेट के लिए केमिस्ट शॉप पर तकरीबन ढाई सौ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। जबकि जन औषधि केंद्र पर इसी मेटाफार्मिंग साल्ट की दवा रुपए में मिल जाती है। एंटीबायोटिक अमाक्सीसिलिन के लिए सामान्य केमिकल स्टोर पर सवा सौ रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं जबकि जन औषधि केंद्र में महज पर रुपए में यह दवाएं मिल जाती हैं। सांस की बीमारी में इस्तेमाल की जाने वाली मोंटेलूकास्ट साल्ट की दस टैबलेट तकरीबन साढ़े तीन सौ रुपए में मिलती हैं जबकि यहां पर इस दाव की कीमत महज 20 रुपए ही है। रवि दाधीच कहते हैं कि उनके पास इस वक्त दो हजार से ज्यादा दवाएं और सर्जिकल उपकरण मौजूद हैं। वह उम्मीद जताते हैं कि आने वाले सालों में के लोगों को दुनिया की सबसे सस्ती दवाई ऐसे ही लगातार बढ़ते हुए जन औषधि केदो के माध्यम से मिलती जाएंगी।

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