एलजी मनोज सिन्हा की नाक के नीचे घोटाला
पवन खेड़ा ने कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में यह खुलासा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा की नाक के नीचे यह घोटाला हुआ है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इस घोटाले में एलजी मनोज सिन्हा और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर शक की सुई जाती है। केंद्रीय मंत्री पर शक की सुई इसलिए जाती है, क्योंकि उन्होंने एक व्हिसलब्लोवर को सजा दी है। दूसरी तरफ उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त अधिकारियों को बचाया है।
अनुमोदन के बिना टेंडर निकाला गया
खेड़ा के मुताबिक, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए कई तरह की अनियमितताएं बरती गई हैं। जैसे बिना तकनीकी मंजूरी और प्रशासनिक अनुमोदन के टेंडर निकाला गया। टेंडर प्रक्रिया के दौरान बरती गई अनियमितताएं ना बाहर आएं, इसके लिए योजनाओं का बंटवारा किया गया। कम्पोजिट टेंडर की प्रथा को त्याग दिया गया। योजना के अंतर्गत लगभग हर जिले में ठेकेदारों द्वारा घटिया काम किया गया। विभिन्न स्तरों पर बार-बार चर्चा के बावजूद किसी विशेषज्ञ सलाहकार को नियुक्त नहीं किया गया। आईएएस अधिकारी ने अपनी शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
बैठक कक्ष से आईएएस को बाहर निकाल दिया
पवन खेड़ा के अनुसार, इस मामले में एलजी मनोज सिन्हा ने छह जून 2022 को आईएएस अधिकारी परमार को बिना किसी गलती के परेशान किया। उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया। एलजी ने अफसरों की बैठक से उक्त आईएएस अधिकारी को बाहर निकाल दिया था। भारत सरकार की स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए उनका लगातार तबादला किया गया। परमार का एक वर्ष में चार बार स्थानांतरण किया गया। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को लिखे एक पत्र में परमार ने जम्मू-कश्मीर के एलजी और मुख्य सचिव पर उत्पीड़न, धमकी एवं बदतमीजी का आरोप लगाया है। अपनी शिकायत में अधिकारी ने कहा, उनके लगातार स्थानांतरण का कारण जातिगत भेदभाव व पूर्वाग्रह है।
इस घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है?
खेड़ा ने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, घोटाले को उजागर करने वाले आईएएस अधिकारी को क्यों परेशान किया गया है। घोटाले का असली मास्टरमाइंड कौन है। घोटाले की बड़ी मछली कहां है। लूट का पैसा कहां गया है। गृह मंत्रालय में शिकायतों और सीबीआई जांच की मांग के बावजूद घोटाले की विस्तृत जांच के आदेश क्यों नहीं दिए गए। इस मामले में केंद्र सरकार, किसे बचाने की कोशिश कर रही है। एक दलित आईएएस अधिकारी के उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के बावजूद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने एलजी को तलब क्यों नहीं किया। अशोक परमार पर झूठे आरोप लगाए गए कि वो कॉन्ट्रैक्ट समिति के प्रमुख बनना चाहते थे। इसका कोई लिखित सबूत नहीं हैं। ऐसे में क्या यह एक व्हिसलब्लोअर का उत्पीड़न नहीं है।