पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने यह कार्रवाई तब की, जब बुधवार को आधे घंटे के अंतराल में दो दलों ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था। पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को भेजी चिट्ठी में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि उनके साथ 56 विधायक हैं।
महबूबा ने चिट्ठी में राज्यपाल को लिखा कि आप जानते हैं कि पीडीपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है, हमारे पास 29 विधायकों की ताकत है। आपको मीडिया के जरिए पता लगा होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस भी सरकार बनाने में हमारा समर्थन करने की इच्छा रखती हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायक हैं। सभी मिलकर हमारी संख्या 56 हो जाती है। मैं अभी श्रीनगर में हूं और मेरे लिए आपसे अभी मुलाकात संभव नहीं है। इस पत्र के जरिए हम आपको ये सूचित कर रहे हैं कि हम सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए जल्द ही आपसे मिलना चाहते हैं।
महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को ट्वीट कर जानकारी दी थी कि उन्होंने विधानसभा में फैक्स करके सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने फैक्स रिसीव किया, न ही उन्हें कोई जवाब दिया गया।
हालांकि राजभवन ने ऐसा कोई फैक्स मिलने से इन्कार कर दिया, जिसके बाद महबूबा ने राज्यपाल को संबोधित पत्र ट्वीट किया और कहा कि वह फोन या फैक्स के जरिए राज्यपाल से संपर्क करने में विफल हैं, इस नाते ट्वीट का सहारा ले रहीं हैं।
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन।
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महबूबा के दावे के 15 मिनट बाद ही पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी राज्यपाल को चिट्ठी भेजने की बात कही। राज्यपाल के निजी सचिव जीवन लाल को वॉट्सऐप पर भेजे पत्र को सज्जाद ने ट्विटर पर शेयर किया। इसमें सज्जाद ने दावा किया कि भाजपा के सभी विधायकों का समर्थन हमें हासिल है। इसके अलावा 18 से ज्यादा अन्य विधायक भी हमें सपोर्ट कर रहे हैं। ये संख्या बहुमत से ज्यादा है। मैं भाजपा और दूसरे सदस्यों के समर्थन के पत्र पेश कर रहा हूं। हम भरोसा दिलाते हैं कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए मजबूत और टिकाऊ सरकार बनाएंगे। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के 2 विधायक हैं, भाजपा के सदस्यों की संख्या 25 और इसके अलावा लोन ने 18 अन्य के समर्थन की बात कही। इस तरह सज्जाद ने 45 सदस्यों के समर्थन का दावा किया।
Governor Satyapal Malik
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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने इस कदम के बचाव में कहा कि उन्होंने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि वो राज्य में ऐसी गठबंधन सरकार बनने का अधिकार नहीं दे सकते, जो काम करने के योग्य न हो। उन्होंने कहा कि 'यह मेरी जिम्मेदारी थी कि मैं राज्य को ऐसी परेशानियों से बचाऊं। ये फैसला सोच-समझकर लिया गया है, जल्दबाजी में नहीं।'
राज्यपाल ने कहा कि मशीनें कभी-कभी काम नहीं करती हैं। ईद पर कोई भी कर्मचारी फैक्स मशीन के पास तो नहीं रहेगा। महबूबा मुफ्ती को चिट्ठी एक दिन पहले भेजनी चाहिए थी, हालांकि महबूबा मुफ्ती ने दावा किया है कि उन्होंने राज्यपाल के नाम ईमेल भी किया था। राज भवन ने देर रात एक बयान जारी कर विधानसभा भंग करने के पीछे की वजहों को स्पष्ट किया है।
फैक्स मशीन के सवाल पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि कल ईद का मौका था, सभी मुसलमान जानते हैं कि कल छुट्टी थी। सारे ऑफिस बंद थे, मेरा रसोइया तक छुट्टी पर था। फैक्स मशीन को चलाने वाले की बात छोड़ दीजिए। अगर मुझे फैक्स मिल भी जाता तो मैं यही फैसला लेता, जो मैंने लिया है। राज्यपाल ने अपने फैसले के खिलाफ विपक्ष के कोर्ट में जाने के सवाल पर कहा कि वो कोर्ट में जा सकते हैं, लेकिन जो लोग पिछले 5 महीने से विधानसभा भंग किए जाने की बात कर रहे थे वो अब फैसले का विरोध क्यों कर रहे हैं?
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल सीटें: 87
बहुमत के लिए जरूरी सीटें: 44
| पार्टी |
सीटें |
| पीडीपी |
28 |
| भाजपा |
25 |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) |
15 |
| कांग्रेस |
12 |
| अन्य |
7 |
| कुल |
87 |
जम्मू-कश्मीर में आगे क्या...
विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में निर्वाचन के जरिए ही नई सरकार बनाई जा सकती है।
माना जा रहा है कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
जिस तरह पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ समर्थन का दावा किया, ऐसे में आगामी चुनावों में इनके साथ आने के भी कयास हैं।
पिछले 24 घंटे में राज्य की सियासत ने कई करवट ली और आखिर में राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर ही दिया। मंगलवार शाम से ही जारी सरकार बनाने की चर्चाओं के साथ बुधवार को घटनाक्रम पल-पल बदलता रहा। कुछ इस तरह चला पूरा घटनाक्रम...
दोपहर करीब 12.45 बजे पीडीपी नेता सईद अल्ताफ बुखारी की नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के साथ बैठक हुई। यह बैठक लगभग एक घंटे तक चली और इसके साथ ही राज्य के सियासी घटनाक्रम तेजी से बदलने लगा।
दोपहर दो बजे अल्ताफ बुखारी ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के साथ गठजोड़ की कवायद की पुष्टि कर दी।
दोपहर बाद 2.30 पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर ने भी गठजोड़ पर चर्चा की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला आलाकमान लेगी।
दोपहर बाद तीन बजे नेकां के महासचिव अली मुहम्मद सागर व पूर्व स्पीकर मुबारक गुल ने कहा कि पीडीपी के साथ गठजोड़ का अंतिम फैसला गुरुवार को कोर ग्रप की बैठक में होगा।
3.30 बजे राजभवन ने किसी भी दल द्वारा गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने से इन्कार किया।
शाम चार बजे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर गठजोड़ पर चर्चा के लिए श्रीनगर से दिल्ली रवाना हो गए।
शाम पांच बजे नेशनल कांफ्रेंस के अतिरिक्त महासचिव डॉ. मुस्तफा कमाल ने पीडीपी व कांग्रेस के गठजोड़ को आत्मघाती बताया।
इसी बीच पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन और पीडीपी के बागी विधायक इमरान रजा अंसारी लंदन यात्रा बीच में ही छोड़ दिल्ली पहुंचे।
शाम 6.00 बजे के करीब पीडीपी ने पहली बार दावा किया कि उसने राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए अपना दावा पेश कर दिया है। लेकिन राजभवन ने पुष्टि नहीं की।
शाम 6.45 बजे के करीब राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने सभी सलाहकारों और प्रमुख सचिव उमंग नरुला को राजभवन में बुलाया।
रात 8.00 बजे महबूबा ने ट्विटर पर राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए भेजे गए पत्र को अपलोड कर दिया। इसमें 56 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया था।
रात 8.30 बजे पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने भी ट्विटर पर दावा किया कि उन्होंने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया है और राज्यपाल को वाट्सएप करने के अलावा पत्र भी भेजा है।
सज्जाद गनी लोन के दावे के चंद मिनटों बाद राजभवन से सूचना आई कि राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए जारी उठापटक में जुटे विभिन्न दलों को पटखनी देते हुए गत पांच माह से निलंबित राज्य विधानसभा को भंग कर दिया है। इस तरह से प्रदेश में सरकार गठन की तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया।