क्या है अंदेशा
वायुसेना से अवकाश प्राप्त वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अफगानिस्तान में अमेरिका की फौज के वापस जाने के बाद तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि उनमें भी सत्ता को लेकर बड़ा मतभेद सामने आया है, लेकिन इससे पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों को नई ऊर्जा मिल गई है। लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) बलबीर सिंह संधू का भी कहना है कि पाकिस्तान पर अमेरिका का दबाव कम हुआ है। चीन के साथ उसके संबंध ठीक चल रहे हैं। अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान को कुछ करने का मौका मिल रहा है। इसके अलावा अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क को भी बड़ी सफलता मिली है। भारत में आतंकवाद फैलाने वाले और पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठन इससे उत्साहित होकर नापाक हरकते करने की फिराक में हैं। इसके कारण इस ठंड के महीने में घुसपैठ बढ़ने की आशंका ज्यादा है। हालांकि इसमें उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिलने वाली है।
क्या अफगानी आतंकियों के घुसपैठ की भी आशंका है?
सीमापार से घुसपैठ का दबाव है। पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी इसके लिए घात लगाए बैठे हैं, लेकिन अभी तक आतंकवादियों के रूप में अफगान के शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाया है। हालांकि सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सैन्य अधिकारी के अनुसार जिन आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई है, उससे पता चल रहा है कि पहले की तुलना में अधिक प्रशिक्षित आतंकी आ रहे हैं। इनके पास इलेक्ट्रानिक उपकरण, इम्प्रूव्ड डिवाइस अन्य साजो-सामान मिल रहे हैं। यह सब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आदि के सहयोग के बिना संभव नहीं है।