मेहता ने कहा कि कश्मीर की स्थिति असाधारण थी और आजादी के बाद से वहां ऐसी स्थिति है। असाधारण स्थिति के लिए असाधारण उपाय जरूरी है। उन्होंने कहा कि पाबंदी का स्तर क्या होना चाहिए यह वहां के अधिकारियों पर छोड़ देना चाहिए। जब तक सीधे तौर पर ऐसा न लगे कि निर्णय मनमाने तरीके से लिया गया है, तब तक उसमें दखल देने का कोई कारण नहीं बनता। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वहां किसी व्यक्ति की आवाजाही पर पाबंदी नहीं है। केवल समूह की आवाजाही पर पाबंदी है।
लैंडलाइन पर पाबंदी क्यों लगाई गई
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अनुच्छेद-19 अधिकारों के संतुलन की बात करता है। इसी के नाते वह जानना चाहते हैं कि आखिर लैंडलाइन पर पाबंदी क्यों लगाई गई। प्रशासन ने कहा कि 99 फीसदी बच्चे परीक्षा में बैठे, लेकिन सवाल यह है कि आखिर उन बच्चों के पास विकल्प ही क्या था। परीक्षा में न बैठने पर उनका एक वर्ष चला जाता। इसके अलावा बहुत लोग इंटरनेट के जरिये व्यवसाय करते हैं, लेकिन यह बंद होने से वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं।