जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। उसने रविवार को तेदेपा के चंद्रबाबू नायडू और जद (यू) के नीतीश कुमार से मुललमानों की भावनाओं का ध्यान रखने की अपील की। जमीयत ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में जो दल धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं, उन्हें इस खतरनाक विधेयक का समर्थन करने से बचना चाहिए।
इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित 'संविधान बचाओ सम्मेलन' में जमीयत प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा, 'देश के लोगों ने भाजपा को हराया। उन्होंने उनकी नीतियों को स्वीकार नहीं किया। यह सरकार दो बैसाखियों पर चल रही है- एक मजबूत बैसाखी हैं चद्रबाबू नायडू और दूसरे हैं बिहार के नीतीश कुमार। मैंने नायडू को आमंत्रित किया था। लेकिन उन्होंने मना कर दिया और अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष नवाब जान को भेजा। मैं इसे सकारात्मक रूप में देखता हूं, क्योंकि वह यहां मौजूद लोगों की भावनाएं बताएंगे।' मदनी ने कहा, 'अगर वक्फ विधेयक मुसलमानों की भावनाओं को नजरअंदाज करके पारित किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी बैसाखियों की भी होगी।'
'अपने धर्मनिरपेक्ष होने का प्रमाण दें एनडीए के सहयोगी'
सम्मेलन में जमीयत ने एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें कहा गया कि वक्फ बोर्ड में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को शामिल नहीं किया जाना चाहिए और संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को केवल मुसलमानों, मुस्लिम संगठनों और मुस्लिम नेताओं से परामर्श करना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया, 'जमीयत वक्फ संशोधन विधेयक पर विपक्षी दलों के रुख का समर्थन करती है और एनडीए के दलों से अपील करती है कि वे इस खतरनाक प्रस्तावित विधेयक का समर्थन करने से बचें और अपने धर्मनिरपेक्ष होने का प्रमाण दें।'
चंद्रबाबू के इलाके में पांच लाख मुसलमानों की सभा करेंगे मदनी
मदनी ने कहा कि जमीयत ने तय किया है कि इस महीने के अंत या दिसंबर में वह चंद्रबाबू नायडू के क्षेत्र में करीब पांच लाख मुसलमानों की सभा आयोजित करेंगे और मुसलमानों की भावनाएं उनके सामने रखेंगे। उन्होंने इस बात को दोहराया कि अगर यह विधेयक पारित होता है, तो जिन 'बैसाखियों' पर सरकार चल रही है, वे इसकी जिम्मेदारी से नहीं बचेंगे। जमीयत प्रमुख ने कहा, 'वक्फ हमारे पूर्वजों ने स्थापित किया है और यह अल्लाह की संपत्ति का हिस्सा है, जिस पर मस्जिदें बनी हैं।'
'मस्जिदों को हड़ने की कोशिश कर रहा एक वर्ग'
उन्होंने कहा, 'आपको (केंद्र सरकार) उनकी रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि हम इस देश में रहते हैं और हम बाहर से नहीं आए हैं। अगर एक हिंदू गुज्जर है, तो एक मुसलमान भी गुज्जर है। अगर एक हिंदू जाट है, तो एक मुसलमान भी जाट है। वे नारे लगाते हैं कि हिंदू, मुसलमान और सिख अलग हैं। लेकिन हम कहते हैं कि हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई सब भाई-भाई हैं।' मदनी ने कहा, 'दिल्ली में इतनी सारी मस्जिदें हैं, जिनमें से कुछ 400-500 साल पुरानी हैं। भारत में एक वर्ग है जो इन मस्जिदों को हड़पने की कोशिश कर रहा है। कौन 500 साल पुराने दस्तावेज पेश कर सकता है? कानून कहता है कि जो भी मस्जिद वक्फ भूमि पर बनी है, वह वास्तव में वक्फ की है।'
आम चुनाव में मुसलमानों ने किया विपक्षी गठबंधन का समर्थन
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी गठबंधन और (कांग्रेस नेता) राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि अगर वे सत्ता में आएंगे, तो सभी अल्पसंख्यक अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र होंगे, जिसका हमने स्वागत किया। इसलिए मैंने मुसलमानों से अपील की कि वे उस गठबंधन का समर्थन करें, जो उन्हें अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। मुझे खुशी है कि मुसलमानों ने देशभर में इस गठबंधन का समर्थन किया और गठबंधन आगे बढ़ा और भाजपा हार गई।
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