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SC: जमानत आदेशों के त्वरित पालन के लिए फास्टर सेल तक पहुंच बनाएं जेल अधिकारी, शीर्ष अदालत ने दिए निर्देश

Thu, 21 Mar 2024 07:14 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला ब्यूरो

सार

अमल में देरी से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से अदालती आदेशों के त्वरित और सुरक्षित प्रसारण के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मार्च 2022 में फास्ट एंड सिक्योर्ड ट्रांसमिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स (फास्टर) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने जमानत आदेशों के त्वरित अनुपालन के लिए ‘फास्टर सेल’ के जरिये आदेशों तक पहुंच बनाने के जेल अधिकारियों को कई निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने ये निर्देश जेल अधिकारियों के जमानत आदेशों को लागू न करने को देखते हुए दिए।

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अमल में देरी से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से अदालती आदेशों के त्वरित और सुरक्षित प्रसारण के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मार्च 2022 में फास्ट एंड सिक्योर्ड ट्रांसमिशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स (फास्टर) सॉफ्टवेयर लॉन्च किया था। जस्टिस अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि इस अदालत की ओर से कई जमानत आदेश पारित किए जा रहे हैं, जिन्हें जेल अधिकारियों को लागू करने की आवश्यकता है। जेल अधिकारियों का यह कर्तव्य है कि वे अदालत के पारित आदेशों पर कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि आरोपी को इस अदालत के आदेश के अनुसार संबंधित अदालत में पेश किया जाए।

शीर्ष अदालत ने वकील स्मरहर सिंह के माध्यम से दायर एक विविध आवेदन पर आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता लक्ष्मण राम को 5 फरवरी को एक आपराधिक मामले में जमानत दिए जाने के बावजूद जेल अधिकारियों की ओर से रिहा नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने लक्ष्मण राम को सात दिनों में ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया था।
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हालांकि, शीर्ष अदालत के 16 फरवरी को आवेदन पर सुनवाई के लिए सहमत होने से पहले, लक्ष्मण राम को जेल से रिहा कर दिया गया। 16 फरवरी को पीठ ने कहा कि इस तथ्य के बावजूद कि संबंधित व्यक्ति को रिहा कर दिया गया, ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोपी को पेश करने में देरी के संबंध में उठाए गए मुद्दे पर विचार करना होगा।

बनाया जाए प्रोटोकॉल
पीठ ने 4 मार्च को पारित अपने अंतिम आदेश में कहा कि जमानत देने वाले आदेशों के प्रभावी संचार के लिए अदालत ने ‘फास्टर सेल’ नामक एक प्रोटोकॉल बनाया है और इसके कार्यान्वयन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी निर्धारित की गई है। हम देशभर की विभिन्न जेलों के जेल अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि ई-मेल को एसओपी के अनुसार दिन में दो बार (सुबह के साथ-साथ कार्यक्रम में भी) एक्सेस किया जाए। जेल अधिकारियों को आदेशों को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को संबंधित अदालतों के समक्ष पेश कर कार्रवाई करनी चाहिए।

पीठ ने कहा कि ‘फास्टर’ योजना का सबसे प्रासंगिक हिस्सा यह है कि जमानत देने वाले सभी आदेश संबंधित अधिकारियों जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों, जिला अदालतों और जेल अधीक्षकों को ई-मेल के माध्यम से भेजे जाते हैं। जमानत देने वाले इस अदालत के आदेश पर एक डिजिटल हस्ताक्षर और एक क्यूआर कोड होता है। फास्टर सेल के माध्यम से सिस्टम पर ऑर्डर डालने के तुरंत बाद एसएमएस उत्पन्न होता है। पीठ ने कहा कि यदि ‘फास्टर सेल’ के माध्यम से अपलोड किए गए आदेशों की वास्तविकता के बारे में कोई संदेह है, तो जेल अधिकारी सत्यापन के लिए हमेशा शीर्ष अदालत की वेबसाइट देख सकते हैं।

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