केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने शनिवार को तीन तलाक को संविधान और सभ्यता के खिलाफ करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब देश को न्याय के सिद्धांत, सम्मान और समानता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए इस लैंगिक भेदभाव को समाप्त कर देना चाहिए। नायडू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि तीन तलाक संविधान, कानून, लोकतंत्र के सिद्धांतों और सभ्यता के खिलाफ है और समाज में इस तरह के विचार पैदा हो रहे हैं। इस विषय पर बहस हो रही है। पहले ही बहुत अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में अब समय आ गया है जब देश को आगे बढ़कर इस भेदभाव को खत्म करने और लैंगिक न्याय और समानता लाने के लिए तीन तलाक को समाप्त कर देना चाहिए।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर नायडू ने कहा कि तीन तलाक के मामले में मुस्लिम महिलाएं भी न्याय की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी के साथ किसी तरह का लैंगिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। लैंगिक न्याय होना चाहिए और संविधान के समक्ष सभी बराबर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समय यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ऐसे में कोई भी अदालत में अपनी चिंता को रख सकता है।
समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर नायडू ने कहा कि सरकार सब कुछ पारदर्शी तरीके से करेगी। वह इस मुद्दे पर संसद को भी विश्वास में लेगी। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ग दुष्प्रचार कर रहे हैं कि सरकार पिछले दरवाजे से समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास कर रही है जो कि पूरी तरह से गलत है।