फैसले को राज्य में नहीं मिलनी चाहिए अनुमति: यशोमति ठाकुर
इस सप्ताह की शुरुआत में महिला एवं बाल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने प्रशासन को एक पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने विधवाओं को सम्मान देने के लिए उनका जिक्र करने के लिए 'गंगा भागीरथी' शब्द के इस्तेमाल का प्रस्ताव किया था। इस पर पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री ठाकुर ने एक बयान में कहा, 'मैं यशोमति हूं। मैं अपने नाम के आगे गंगा भागीरथी का उल्लेख क्यों करूं? मैं गंगा भागीरथी नहीं हूं और न ही मैं अपने नाम के आगे कभी इसका उल्लेख करूंगा।' ठाकुर ने कहा, 'हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मना रहे हैं, मैं इस बात पर जोर देना चाहती हूं कि हमें इस राज्य में इस तरह के फैसले की अनुमति नहीं देनी चाहिए।'
संविधान ने दिलाई गरीबों, वंचितों और महिलाओं को आजादी
उन्होंने आगे कहा, "मैंने अपने पति को खोया और उनके आकस्मिक निधन के बाद अपने बच्चों की परवरिश अकेले की। इस देश के संविधान की बदौलत मैंने समानता और शिक्षा का अधिकार अर्जित किया है। आज, मुझे एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में पहचाना जाता है। संविधान ने सभी दलितों, शोषितों, वंचितों और महिलाओं को गुलामी की जंजीरों से आजादी दी है। हालांकि, मनुवादी ताकतें लगातार इन वर्गों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं।"
अंबेडकर जयंती पर साजिश को नाकाम करने की करें कोशिश
ठाकुर ने कहा कि यह एक खतरनाक साजिश है और डॉ. आंबेडकर की जयंती पर आइए हम इस साजिश को नाकाम करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा, प्रगतिशील विचार का झंडा बुलंद करने में महाराष्ट्र हमेशा सबसे आगे रहा है। लेकिन, इसी राज्य में विधवाओं को 'गंगा भागीरथी' कहने के प्रस्ताव को लेकर बहस छिड़ी हुई है। यह एक त्रासदी है। जाति और धार्मिक विभाजन को पाटने के लिए इस राज्य में अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने खुद इसकी वकालत की थी। प्रस्ताव लाने के लिए मंत्री लोढ़ा पर निशाना साधते हुए ठाकुर ने कहा कि वह अंतर जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह पर रोक लगाने की बात करते हैं और अन्य अवसरों पर गंगा-भागीरथी की भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
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