देश भर के थर्मल पावर प्लांट के लिए उत्सर्जन मानकों का पालन करने की समय सीमा वर्ष 2022 तक बढ़ाने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने बुधवार को कहा कि लगता है सरकार के लिए लोगों का स्वास्थ्य कोई मायने नहीं रखता है।
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उत्सर्जन मानकों का पालन करने में अथॉरिटी कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। यही वजह है कि वायु प्रदूषण के कारण नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य परेशानी हो रही है।
ऊर्जा मंत्रालय के हलफनामे पर गौर करने के बाद पीठ ने कहा कि साफ है कि मंत्रालय थर्मल पावर प्लांट से होने वाले प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है। पीठ ने कहा कि यहां तक 2022 की डेडलाइन को भी पूरा नहीं किया जाएगा।
पीठ ने पर्यावरण व वन मंत्रालय की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी को ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया और उसके बाद हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
पीठ ने कहा कि हलफनामे में इसका जिक्र होना चाहिए कि 500 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले कितने थर्मल पावर प्लांट हैं और वे कहां-कहां हैं। अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।