फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानसून सत्र: जानें, किन मुद्दों पर घिरेगी सरकार

Mon, 18 Jul 2016 06:00 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
संसद का मानसून सत्र शुरु हो चुका है। इसके काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद लगाई जा रही है।  एक तरफ जहां सरकार की कोशिशें ज्यादा से ज्यादा बिलों को पास कराने की होगी जिसमें जीएसटी बिल भी शामिल है वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल सरकार को घेरने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।
विज्ञापन


सत्र शुरु होने से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने सभी दलों की बैठक बुलाकर सदन को सुचारु रुप से चलने देने और जीएसटी जैसे अतिमहत्वपूर्ण बिल को पास कराने में मदद देने की अपील की थी।  हांलाकि उस बैठक के बाद कांग्रेस ने ये कहते हुए पेंच लगा दिया है कि वो इस बिल की मेरिट देखकर ही कुछ फैसला करेंगे।
 
इस समय विपक्ष के पास संसद में सरकार को घेरने के लिए अरुणाचल प्रदेश के हालिया घटनाक्रम के अलावा उत्तराखंड का मुद्दा भी अहम होगा।  इन दोनों राज्यों में केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार की किरकिरी हुई है। जाहिर सी बात है कि कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष सरकार को इस पर बुरी तरह से घेरने की तैयारी में है।  विपक्ष के तेवर देखते हुए लगता है कि सत्र के शुरुआती दिन काफी हंगामेदार रहने वाले हैं।
विज्ञापन


इसके साथ ही दालों के दामों में वृध्दि सहित किसानों पर लगातार बढ़ते हुए कर्ज और खेती के क्षेत्र में लगातार जो स्थितियां बिगड़ रहीं हैं उस पर भी सरकार विपक्ष के निशाने पर होगी। पिछले कई दिनों से मोदी सरकार को महंगाई के मुद्दे पर भी मुंह की खानी पड़ रही है।

इसके अलावा एक और मुद्दा जो विपक्ष का हथियार बनेगा वो है कश्मीर में हुई ताजा हिंसा। ये तय माना जा रहा है की कश्मीर में भड़की हिंसा और प्रदर्शन का मुद्दा दोनों सदनों में उठेगा। कश्मीर में इसके चलते काफी 40 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जबकि तीन हजार से भी अधिक लोग घायल हुए हैं। विपक्षी दलों का ये कहना है कि सरकार की पुरी मशीनरी इस स्थिति से निपटने में सफल नहीं हो पाई और वो इसे केंद्र और राज्य सरकार की बड़ी नाकामी के तौर पर देख रहे हैं।

विपक्ष कश्मीर सहित पाकिस्तान के साथ सरकार के नजरिए को लेकर एक बहस की उम्मीद कर रहा है और वो चाहता है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करे । एक और मुद्दा जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान खींचा और जिसमें भारत को मुंह की खानी पड़ी वो है एनएसजी का इश्यू. सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि (एनएसजी) की सदस्यता नहीं मिल सकी। जाहिर सी बात है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की नाकामियों को गिनाएगा और उसे जिम्मेदार भी ठहराएगा ।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें