एनसीपी नेता अजित पवार ने भी कांग्रेस नेता की मांग का समर्थन किया। बहरहाल, राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने इस आरोप को खारिज किया कि सरकार मराठा संगठनों को विरोध प्रदर्शन करने से रोक रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग श्रेणी में मराठा समुदाय को आरक्षण देने की सिफारिश स्वीकार कर ली है।
मंत्री ने कहा कि मौजूदा आरक्षण में कोई हेरफेर किए बगैर कानूनी एवं संवैधानिक ढांचे के दायरे में आरक्षण दिया जाएगा। मुस्लिमों के लिए आरक्षण पर उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और केरल में धर्म के आधार पर दिया गया आरक्षण अदालत में नहीं टिका। उन्होंने कहा, ‘‘मुस्लिमों के सभी पिछड़े समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण दिया गया है। यदि और जातियों को जोड़ने की जरूरत है तो राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का रुख किया जाना चाहिए।’’
अजित पवार ने मंत्री की इस टिप्पणी पर विरोध जताया और कहा कि अदालत ने शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम आरक्षण स्वीकार किया है। भाजपा नेता आशीष शेलार ने कहा कि दोनों विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे पर ‘‘घड़ियाली आंसू’’ बहा रही हैं और उनका एकमात्र एजेंडा ‘‘समाज को बांटना’’ है। हंगामे के बीच सदन पहले 10 मिनट और बाद में प्रश्न काल के अंत तक के लिए स्थगित कर दिया गया।