इसरो के यूआर राव उपग्रह केंद्र के निदेशक एम शंकरन ने पीटीआई-भाषा से कहा कि अधिक वैज्ञानिक परिणामों के साथ मंगल मिशन बड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि आप मंगल ग्रह पर किसी नए मिशन की बात कर रहे हैं, तो व अभी भी अध्ययन के चरण में है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने गुरुवार को कहा कि मंगल ग्रह के लिए दूसरा मिशन अध्ययन के चरण में है क्योंकि अंतरिक्ष एजेंसी इस मिशन को पूरा करने के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।
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इसरो के यूआर राव उपग्रह केंद्र के निदेशक एम शंकरन ने पीटीआई-भाषा से कहा कि अधिक वैज्ञानिक परिणामों के साथ मंगल मिशन बड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि आप मंगल ग्रह पर किसी नए मिशन की बात कर रहे हैं, तो व अभी भी अध्ययन के चरण में है। हम किसी मिशन को साकार करने के लिए हमारे पास उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) के संबंध में इसे काफी बड़ा या अधिक वैज्ञानिक परिणाम के साथ होना चाहिए। शंकरन ने कहा कि हम अभी अध्ययन के चरण में हैं और हम इस खास काम को अनुरूप बना रहे हैं।
भारत ने 5 नवंबर, 2013 को 'मंगलयान' नामक अपना पहला 'मार्स ऑर्बिटर मिशन' सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जिसने 24 सितंबर, 2014 से लाल ग्रह की परिक्रमा शुरू की थी। ऑर्बिटर का अक्तूबर 2022 में संपर्क टूट गया था और इस तरह मंगलयान-1 मिशन समाप्त हो गया था।
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चंद्रयान-3 के बारे में उन्होंने कहा कि चंद्र अंतरिक्ष यान पहले ही प्रक्षेपण केंद्र पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा, श्रीहरिकोटा में तैयारी चल रही है। हमें उम्मीद है कि जुलाई में किसी समय प्रक्षेपण होगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिक के मुताबिक, मिशन के हर पहलू की जांच की गई है, विशेष रूप से उन अनुभवों की जो इसरो ने अपने चंद्रयान -2 मिशन से प्राप्त किए थे। उन्होंने कहा, सभी संभव एहतियात बरती गई है। इसरो उत्साहित है।
भारत के अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' के बारे में शंकरन ने कहा कि यह एक गंभीर परियोजना है जिसमें कई नई विकास गतिविधियां हो रही हैं। उन्होंने कहा, कई घटनाक्रम और कई परीक्षण हो रहे हैं, जो जनता को दिखाई नहीं दे रहे हैं। बहुत सारे काम चल रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि कुछ ऐसा होगा जो इस साल के दौरान लोगों को दिखाई देगा।