एस्ट्रोसैट को हमारे देश ने आठ साल पहले अंतरिक्ष में भेजा था। उस वक्त इसके पांच साल काम करने की उम्मीद थी, लेकिन यह अब भी बेहद प्रभावशाली ढंग से उपयोग हो रही है।
ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हमारा सूर्य अपने पूरे जीवन काल में जितनी ऊर्जा पैदा करेगा, उतनी गामा किरण विस्फोट (जीआरबी) एक सेकंड में पैदा कर सकते हैं। भारत की एस्ट्रोसैट दूरबीन ने ऐसे 600 से ज्यादा विस्फोट अब तक दर्ज कर लिए हैं।
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एस्ट्रोसैट को हमारे देश ने आठ साल पहले अंतरिक्ष में भेजा था। उस वक्त इसके पांच साल काम करने की उम्मीद थी, लेकिन यह अब भी बेहद प्रभावशाली ढंग से उपयोग हो रही है।
इस उपग्रह में लगा उपकरण कैडमियम जिंक टेल्यूराइड इमेजर (सीजेडटीआई) विस्फोटों की पहचान करता है। इसके प्रमुख अन्वेषक दीपांकर भट्टाचार्य ने बताया कि अपनी उम्र पूरी होने के बावजूद सीजेडटीआई ने बेहद शानदार ढंग से 22 नवंबर को अपना 600वां जीआरबी दर्ज किया। इसके प्रदर्शन में कोई गिरावट नहीं आई है। 22 नवंबर के बाद इसने 3 और जीआरबी दर्ज किए।