एनआईएसएआर (NISAR) उपग्रह को नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से बेंगलुरु में विकसित किया गया है। यह पृथ्वी की गतिविज्ञान की समझ को गहरा करेगा और पर्यावरणीय घटना की विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। एनआईएसएआर- नासा और इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार का संक्षिप्त रूप है। यह पृथ्वी की जमीन और बर्फ की सतहों की गतिविधियों को बेहद सूक्ष्मता से निगरानी करने के लिए दोनों संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है।
नासा ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि निसार (NISAR) 2024 की शुरुआत में लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है। निसार उपग्रह के दो प्रमुख घटकों को भारत के बेंगलुरु में एक एकल अंतरिक्ष यान बनाने के लिए जोड़ा गया है। निसार (एनआईएसएआर) उपग्रह जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, ग्लेशियर पिघलने, ज्वालामुखी, भूकंप और अन्य मुद्दों की समझ को गहरा करेगा।
नासा ने अपनी विज्ञप्ति में कहा, निसार हर 12 दिनों में कम से कम एक बार हमारे ग्रह के लगभग हर हिस्से की निगरानी कर लेगा। इसलिए यह उपग्रह वैज्ञानिकों को अन्य अवलोकनों के अलावा, जंगलों, आर्द्रभूमि और कृषि भूमि की गतिविधियों को समझने में भी मदद करेगा।
विज्ञप्ति में कहा गया है, जून में भारत के बेंगलुरु में इसरो के एक कमरे में निसार के रडार उपकरण पेलोड को उपग्रह के अंतरिक्ष यान वाहन के साथ जोड़ने के लिए एक क्रेन का उपयोग किया गया, जो आंशिक रूप से सोने के रंग के थर्मल आवरण में लिपटा हुआ और नीले आवरण के अंदर है। उपग्रह के बेलनाकार रडार उपकरण पेलोड में दो रडार सिस्टम शामिल हैं और यह एक स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (SUV) के आकार का है और आंशिक रूप से सोने के रंग के थर्मल आवरण में लिपटा हुआ है।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, एस-बैंड रडार फसल संरचना और जमीन और बर्फ की सतहों की खुरदरापन (Roughness) की निगरानी के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जबकि एल-बैंड उपकरण अन्य अवलोकन योग्य वस्तुओं के अलावा पेड़ों की लकड़ी के तनों का अध्ययन करने के लिए घने जंगलों में प्रवेश कर सकता है। एस-बैंड और एल-बैंड सिग्नल की तरंग दैर्ध्य क्रमशः 4 इंच (10 सेंटीमीटर) और 10 इंच (25 सेंटीमीटर) है और दोनों सेंसर में बादलों के माध्यम से देखने और दिन और रात का डाटा एकत्र करने की क्षमता है।
विज्ञप्ति में कहा गया है, इसरो तक पहुंचने के लिए पेलोड को एक चक्करदार यात्रा करनी पड़ी। एस-बैंड रडार को पश्चिमी भारत के अहमदाबाद में अंतरिक्ष अनुप्रयोग में बनाया गया था, फिर मार्च 2021 में दक्षिणी कैलिफोर्निया में नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला (जेपीएल) में भेजा गया। जहां इंजीनियर निसार के एल-बैंड रडार को विकासित कर रहे थे। जेपीएल में, मार्च 2023 में दक्षिणी भारतीय शहर बेंगलुरु में यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) में भेजे जाने से पहले दोनों प्रणालियों को पेलोड के बैरल जैसे फ्रेम में तय किया गया था। नासा की विज्ञप्ति में कहा गया है कि लगभग 40 फीट (12 मीटर) व्यास वाला रिफ्लेक्टर अंतरिक्ष में लॉन्च जाएगा, जो अपनी तरह का सबसे बड़ा रडार एंटीना होगा।