भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का महत्वकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-2 30 अगस्त को चंद्रमा की चौथी कक्षा में प्रवेश कर गया। चंद्रयान-2 शाम 6.18 बजे चौथी कक्षा में प्रवेश कर गया।
चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के सतह के गड्ढों की ली थी तस्वीरें
इसरो ने 21 अगस्त को ‘चंद्रयान-2’ की चंद्रमा की ओर आगे बढ़ाने की दूसरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यान से ली गई चंद्रमा की तस्वीरों के दो सेट जारी किए थे।
यान को चांद की सतह से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर चंद्र ध्रुवों के ऊपर से गुजरती अंतिम कक्षा में पहुंचाने के लिए अभी इस तरह की तीन और प्रक्रियाओं को अंजाम दिया जाएगा।
इसरो ने कहा कि इसके बाद दो सितंबर को लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के इर्द-गिर्द 100 किलोमीटर X30 किलोमीटर की कक्षा में प्रवेश करेगा।
इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के लिए धीमी गति और ठहराव जैसी कई सिलसिलेवार एवं जटिल प्रक्रियाओं से गुजरेगा।
इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा है कि चंद्रमा पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ सर्वाधिक ‘‘महत्वपूर्ण’’ क्षण होगा क्योंकि इसरो ने यह पहले कभी नहीं किया है।
इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ चंद्र मिशन-2 का सबसे जटिल चरण है। यह वैज्ञानिकों के लिए बेहद ‘गंभीर’ क्षण होगा।
लैंडर के चांद की सतह पर उतरने के बाद इसके भीतर से ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर बाहर निकलेगा और अपने छह पहियों पर चलकर चांद की सतह पर अपने वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा।
सबकुछ यदि ठीक रहता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इसके साथ ही अंतरिक्ष इतिहास में भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा।