हिमालीय राज्यों को अब बादल फटने के बारे में पूर्व चेतावनी मिल सकेगी। इसरो ने इस बाबत सूचना संग्रह के लिए नया मॉडल विकसित किया है। प्रथम चरण में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इसका परीक्षण प्रयोग के तौर पर शुरू हो गया है। बाद में जम्मू कश्मीर में भी इसका परीक्षण किया जाएगा।
भारी वर्षा की भी पूर्व चेतावनी इसी मॉडल से प्राप्त की जा सकेगी। इसके अलावा आपदा प्रबंधन के लिए सूचना का समृद्ध तंत्र विकसित करने के प्रयास में सफलता मिल रही है। इसरो इस बार अप्रैल में बर्फ पिघलने से पानी के प्रवाह के बारे में भी संबधित राज्यों को पूर्व चेतावनी देगा। हिम गलन प्रवाह की सूचनाएं अप्रैल से जून तक दी जाएंगी। अलकनंदा, भागीरथी, यमुना, सतलुज, व्यास, और चिनाब नदियों के लिए हिम गलन का प्रवाह अध्ययन के लिए मॉडल विकसित कर लिया गया है।
इसरो के सूत्रों ने बताया कि उत्तराखंड में केदारनाथ हादसे के बाद से इसरो भारी वर्षा के कारण होने वाले भूस्खलन के बारे में पूर्व चेतावनी के लिए मॉडल विकसित करने के प्रयास में जुटा था। अब इसके लिए भी मॉडल विकसित हो चुका है। उत्तराखंड में गंगोत्री, बद्रीनाथ तथा केंदारनाथ तक जाने वाले मार्गों तथा पिथौरागढ़ -मालपा मार्ग में होने वाले भूस्खलन के लिए परीक्षणात्मक पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है।