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ऑर्बिटर के बगैर जाएगा चंद्रयान-3, गगनयान मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन

Thu, 02 Jan 2020 02:16 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

  • चंद्रमा के लिए देश के तीसरे मिशन चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण अब अगले साल  
  • गगनयान के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री, इसरो भेजेगा 25 मिशन  
  • चंद्रयान-3 की लागत 250 करोड़ रुपये, प्रक्षेपण की लागत होगी 350 करोड़
  • इसरो ने नए स्पेसपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया है
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इसरो अध्यक्ष के सिवन - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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धरती के एकमात्र उपग्रह चंद्रमा के लिए देश के तीसरे मिशन चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण इस साल नहीं होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख के. सिवन ने बुधवार को बताया कि इस महत्वाकांक्षी यान को भेजने में 14-16 महीने का वक्त लग सकता है। इसका आशय हुआ कि इसे अगले साल 2021 में ही चांद पर भेजा सकेगा। इस परियोजना पर हालांकि काम पहले से चल रहा है। 

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भारत इससे पहले चांद के लिए दो मिशन पूरे कर चुका है। सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 के लिए सरकार की मंजूरी भी मिल गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने चंद्रयान-3 के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि इसे इसी साल 2020 में रवाना किया जाएगा। सिवन ने यहां पत्रकारों को संगठन के बीते साल की उपलब्धियों के बारे में बताया और अगले साल का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि 2020 में 25 मिशनों को पूरा किया जाएगा।

साल 2019 में इसरो की रणनीति विस्तार कार्यक्रमों की थी। इसरो ने नए स्पेसपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया है और यह पोर्ट तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के थुटुकुडी में बनाया जाएगा। श्रीहरिकोटा के अलावा यह ऐसा दूसरा केंद्र होगा। इसरो प्रमुख ने बताया ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी के निर्माण का काम निजी हाथों में सौंपे जाने की योजना है।

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चंद्रयान-3 पर आएगी 600 करोड़ की लागत   

इसरो प्रमुख ने बताया कि चंद्रयान-3, एकदम चंद्रयान-2 जैसा होगा। लेकिन इस बार इसमें सिर्फ लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉडल होगा। इसमें ऑर्बिटर नहीं है क्योंकि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से इसमें मदद ली जाएगी। चंद्रयान-3 की लागत 250 करोड़ रुपये जबकि प्रक्षेपण की लागत 350 करोड़ रुपये आएगी। यानी चंद्रयान-3 पर कुल 600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

उन्होंने एक सवाल के जवाब में बताया कि चंद्रयान-2 का लैंडर बहुत तेज गति होने की वजह से सही दिशा से भटक गया और इसकी वजह से हार्ड लैंडिंग हुई। ये आरोप गलत है कि चंद्रयान-2 की असफलता की वजह से अन्य उपग्रहों के प्रक्षेपण में देरी हुई है। 

सिवन ने कहा कि इसरो मार्च तक वे सारे उपग्रह प्रक्षेपित कर देगा जो 2019 के अंत तक तय किए गए थे। सिवन ने चंद्रयान-2 का मलबा ढूंढ निकालने वाले चेन्नई के षणमुगम को भी बधाई दी और कहा कि इसरो की नीति है कि वह क्षतिग्रस्त मॉडयूल के फोटो जारी नहीं करता। 

गगनयान के चार अंतरिक्ष यात्रियों की रूस में ट्रेनिंग 

सिवन  ने बताया कि बीते साल मानवयुक्त मिशन गगनयान पर काफी काम हुआ और अब 2020 में इसके लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीय वायु सेना से चुने गए इन यात्रियों की ट्रेनिंग इसी महीने के तीसरे सप्ताह में रूस में शुरू होगी। सिवन ने कहा कि अगर गगनयान पर इस साल काम पूरा नहीं हो सका तो अगले साल इसे आकाश में भेजा जाएगा। क्योंकि इनके लिए बहुत तैयारी करनी होती है और जरा सी भी चूक बड़ा नुकसान कर सकती है। इसलिए गगनयान परियोजना  में सतर्कता से काम किया जा रहा है। गगनयान के लिए राष्ट्रीय सलाहकार समिति का गठन किया गया है। 

रूस और फ्रांस से सहयोग

भारत ने गगनयान मिशन पर सहयोग के लिए रूस और फ्रांस के साथ समझौता किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की घोषणा की थी। भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा हैं। वह दो अप्रैल, 1984 को रुसी अंतरिक्ष यान सोयुज टी-11 में बैठ कर अंतरिक्ष गए थे। शर्मा भी भारतीय वायुसेना के पायलट थे।

चयनित अंतरिक्ष यात्रियों का मेडिकल टेस्ट पूरा

इन चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोस्पेस मेडिसिन में फिटनेस टेस्ट के अलावा कई दूसरे तरह के चिकित्सीय परीक्षण किए गए हैं। इसके अलावा इसरो ने बंगलूरू में ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर भी बनाया है। यह केंद्र गगनयान की सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर गगनयान को सफलता मिलती है तो इससे भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की आधारशिला रखी जा सकेगी। 

इसके जरिये अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर सात दिन तक रखने की योजना है। इसरो का लक्ष्य इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को 2022 तक पूरा करने का है। माना जा रहा है कि अंतिम रुप से गगनयान को रवाना करने से पूर्व दो बार मानव रहित मिशन को पूरा करके सारे परीक्षणों का आकलन किया जाएगा। इसमें एक मानवाकृति वाला रोबोट भेजा जा सकता है जो मानवों की तरह अंतरिक्ष में रहेगा और उसे सुरक्षित तरीके से वापस लाया जाएगा। 

सिवन ने बताया कि इस रोबोट पर पड़े प्रभावों का अध्ययन करके यह समझा जाएगा कि इनका मनुष्यों पर कैसा प्रभाव रहेगा। इस मिशन में स्पेस मेडिसिन, अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की निगरानी, जीवन रक्षक प्रणाली, विकिरण संरक्षण, अंतरिक्ष कचरा बचाव और खुद की साफ सफाई के तरीकों का विशेष अध्ययन हो रहा है। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रेविटी, बायोसाइंस और स्पेस ऑपरेशंस जैसे अनुप्रयोगों को अंजाम देंगे। इसरो ने केंद्र से साल 2020-21 के लिए 14 हजार करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। 
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जानिए स्पेस मिशन गगनयान के बारे में

10,000 करोड़ बजट वाले इस मिशन की घोषणा पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। गगनयान मिशन के तहत, तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर इसरो का एक अंतरिक्ष यान 2021 में उड़ान भरेगा। इसरो और भारतीय वायुसेना इस प्रोजेक्ट में मिलकर काम कर रहे हैं। वायुसेना अपने पायलटों में से चयन करके तीन अंतरिक्षयात्री इसरो को देगी। इसके बाद इसरो उन्हें ट्रेनिंग देगा। भारत का यह महत्वकांक्षी मिशन है, जिसमें तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में सात दिन की यात्रा के लिए भेजा जाएगा।

विंग कमांडर निखिल रथ भरेंगे उड़ान

ओडिशा के बलांगीर के विंग कमांडर निखिल रथ ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पहले मानव मिशन गगनयान 2021 के लिए प्रशिक्षण लेने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के चयन के प्रारंभिक चरण को पूरा कर लिया है। इस मिशन के तहत जिनका चयन किया गया है उन्हें बतौर अंतरिक्षयात्री की ट्रेनिंग दी जाएगी। अभी तक इसके लिए 25 पायलट का नाम शॉर्टलिस्ट हुआ है, इसमें ओडिशा के निखिल रथ एक हैं।
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