फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandrayaan-3: इसरो ने शेयर किया वीडियो; बताया लैंडर कैमरे ने सतह पर उतरने से पहले कैसे खींची चांद की तस्वीर

Thu, 24 Aug 2023 09:17 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।

सार

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि रोवर में दो उपकरण और लैंडर पर तीन उपकरण लगे हैं और उन सभी को एक-एक करके रूप से चालू किया गया है। उन्होंने कहा, वे मूल रूप से चंद्रमा की खनिज संरचना, साथ ही चंद्रमा के वातावरण और वहां की भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करेंगे।
विज्ञापन
लैंडर इमेजर कैमरे ने सतह पर उतरने से ठीक पहले चंद्रमा की तस्वीर खींची। - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब@ISRO
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार शाम अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इसरो ने वीडियो ट्वीट कर कहा, "इस वीडियो में बताया गया है कि लैंडर इमेजर कैमरे ने सतह पर उतरने से ठीक पहले चंद्रमा की तस्वीर कैसे खींची।" एक अन्य ट्वीट में इसरो ने कहा, "सभी गतिविधियां निर्धारित समय पर हैं। सभी प्रणालियां सामान्य हैं। लैंडर मॉड्यूल पेलोड ILSA, RAMBHA और ChaSTE ने आज काम करना शुरू कर दिया है। रोवर की गतिशीलता संचालन शुरू हो गया है।" इसरो ने बताया कि प्रॉपल्शन मॉड्यूल पर SHAPE पेलोड रविवार को चालू किया गया था।

विज्ञापन




इससे पहले इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का लैंडर 'विक्रम' चंद्रमा की सतह पर चिह्नित क्षेत्र के अंदर उतरा। सोमनाथ ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, लैंडर चिह्नित स्थान पर सही से उतरा। लैंडिंग स्थल को 4.5 किमी गुणा 2.5 किमी के रूप में चिह्नित किया गया था। मुझे लगता है कि उस स्थान पर और उसके सटीक केंद्र की पहचान उतरने के स्थल के रूप में की गई थी। यह उस बिंदु से 300 मीटर के दायरे में उतरा। इसका मतलब है कि यह लैंडिंग के लिए चिह्नित क्षेत्र के अंदर है।

इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस ‘लैंडर मॉड्यूल’ की सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिग कराई। जिससे भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन गया और पृथ्वी के एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह के अज्ञात दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने वाला पहला देश बन गया।
विज्ञापन


भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ। इसरो ने गुरुवार को घोषणा की कि लैंडर से रोवर बाहर निकल गया है। इसने कहा, भारत ने चांद पर चहलकदमी की।

इसरो प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में कहा कि रोवर अब अच्छी तरह काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि रोवर में दो उपकरण और लैंडर पर तीन उपकरण लगे हैं और उन सभी को एक-एक करके रूप से चालू किया गया है। उन्होंने कहा, वे मूल रूप से चंद्रमा की खनिज संरचना, साथ ही चंद्रमा के वातावरण और वहां की भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करेंगे। कुल 1,752 किलोग्राम वजनी लैंडर और रोवर चंद्रमा के वातावरण का अध्ययन करने के लिए एक चंद्र दिन के प्रकाश में परिचालन करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। हालांकि, इसरो के अधिकारी इनके एक और चंद्र दिवस के लिए सक्रिय होने की संभावना को खारिज नहीं कर रहे।

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सॉफ्ट लैंडिंग के बाद की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा था, इसके बाद एक के बाद एक सारे प्रयोग चलेंगे। ये सभी चंद्रमा के एक दिन में जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है, में पूरे करने होंगे। उन्होंने कहा था कि जब तक सूरज की रोशनी रहेगी, सारी प्रणालियों को ऊर्जा मिलती रहेगी।

सोमनाथ ने कहा, जैसे ही सूर्य अस्त होगा, हर तरफ गहरा अंधेरा होगा। तापमान शून्य से 180 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाएगा। तब प्रणालियों का काम कर पाना संभव नहीं होगा और यदि यह आगे चालू रहता है तो हमें खुश होना चाहिए कि यह फिर से सक्रिय हो गया है और हम एक बार फिर से प्रणाली पर काम कर पाएंगे। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि ऐसा ही कुछ हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें