भारत में अपने पांव जमाने के लिए आईएस लंबे समय से प्रयास कर रहा है। इस संगठन ने दो दिन पहले ही मीडिया में यह बयान जारी किया है कि कश्मीर में आईएस बड़े इलाके में फैल चुका है। आईएस कश्मीर में 'विलायाह ऑफ हिंद' के नाम से अपना नेटवर्क चला रहा है। हालांकि पहले जो भी हमले हुए हैं, उसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों ने ही ली है।
केरल में कथित तौर पर आत्मघाती हमले की साजिश रचने वाले जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था, वह श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार हमले के मास्टरमाइंड जहरान हाशिम से प्रेरित था। संदिग्ध आरोपी रियास से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए हैं।
जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि आरोपी ने बताया है कि वह और उसके अनेक साथी इंटरनेट के माध्यम से आईएस के साथ जुड़े हैं। बता दें श्रीलंका में 21 अप्रैल को हुए आत्मघाती हमलों में करीब 253 लोगों की मौत हो गई थी। केरल के अलावा, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और कश्मीर में आईएस तेजी से पैर जमा रहा है।
माना जा रहा था कि अगर बिना किसी तालमेल के आईएस कश्मीर में पांव जमाने की कोशिश करता है तो उसे दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लड़नी होगी। एक, भारतीय सुरक्षा बलों के साथ और दूसरी पाकिस्तानी संगठनों के साथ। इनमें तथाकथित जिहादी समूह जैसे लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद आदि आतंकी संगठन शामिल हैं।
शुरू में इन संगठनों ने इस्लामिक स्टेट के साथ अपने विलय को स्वीकार नहीं किया था। यह बात आईएस के एक सदस्य राजस्थान निवासी मोहम्मद सिराजुद्दीन ने भी एजेंसियों को बताई थी। आईएस ने कश्मीर में सबसे पहले हिजबुल मुजाहिदीन से निष्कासित जाकिर मूसा को अपने साथ मिलाने का प्रयास किया है। मूसा के साथ अंसार गजवात अल-हिंद के कई लड़ाके भी आईएस के नजदीक आ गए थे। बताया जाता है कि मूसा का कश्मीर के युवाओं में खासा प्रभाव है।
वह सोशल मीडिया के जरिए आईएस को केरल से लेकर कश्मीर तक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा रहा है। मूसा ने ही पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और कश्मीर में अलगाववादियों के बीच बातचीत का तैयार किया था। जांच एजेंसी के एक अधिकारी बताते हैं, यह सही है कि आईएस भारत में अपने पांव पसारने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन इतनी आसानी से आईएस को अपना प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने देंगे, ऐसी गुंजाइश कम है।
एनआईए का कहना है कि भारत में अभी तक जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें करीब 90 प्रतिशत मामले ऑनलाइन प्लेटफार्म पर मिले हैं। कुछ केस ऐसे भी देखे गए हैं, जिनमें युवाओं को सीरिया भेजा गया था। बाद में वे वापस भी आ गए। आईएस को आगे बढ़ाने के लिए तैयार प्रचार सामग्री इंटरनेट के जरिए ही मुहैया कराई जाती है। जांच एजेंसी के मुताबिक, आईएस के गुर्गे भोले-भाले युवकों को जिहाद के नाम पर मौजूदा राजनीतिक संस्थाओं के प्रति भड़काते हैं। उन्हें कुछ सुविधाओं के नाम पर अपने संगठन में शामिल कर लेते हैं। आईएस अपने प्रचार वाले वीडियो में भड़काऊ हिंसा और हमलों की बात करता है।
शुरू में आईएस के सदस्य अबू-उल-ब्रा-अल-कश्मीरी ने स्थानीय लोगों से कहा था कि वे भारत या पाकिस्तान का समर्थन बंद करें। बाद में आईएस अपनी बात पर टिक नहीं सका और कश्मीर के आतंकी संगठनों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने लगा। सुरक्षा एजेंसियां अब फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया साइटों पर 24 घंटे नजर रख रही हैं। भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में अलकायदा के गुर्गों के करीब 980 से इंटरनेट अकांउट हैं। ये भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। जो नए इनपुट मिले हैं, उनमें आतंकी जाकिर मूसा को आईएस से पूरी सपोर्ट मिलने लगी है। हालांकि पुलवामा की घटना के बाद मूसा और दूसरे आतंकी संगठनों के बीच हथियारों की लूटपाट की घटना सामने आई थी।
चूंकि मूसा का कश्मीर के युवाओं पर खासा प्रभाव है, इसलिए अब एक नए गठजोड़ में दूसरे आतंकी संगठन भी मूसा को तव्वजो देने लगे हैं। वे जानते हैं कि उन्हें अपने पांव फैलाने हैं तो मूसा की मदद लेनी होगी। सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों से जुड़े एक अधिकारी ने भी माना है कि कश्मीर में आतंकियों के नए गठजोड़ सामने आ रहे हैं। इन सबकी जानकारी हमें है। समय पर इन्हें कैसे खत्म करना है, यह प्लानिंग भी हम बना चुके हैं। देश के दूसरे हिस्सों में आईएस की जड़ें न फैलें, इसके लिए भी एनआईए जी जान से जुटी है। बहुत जल्द सभी नेटवर्क खत्म कर दिए जाएंगे।