गुजरात एटीएस ने कहा है कि भारत में आतंक फैलाने आए आईएस से जुड़े दोनों संदिग्धों का हैंडलर भारत का ही हो सकता है। एटीएस का कहना है कि दोनों भाई अज्ञात
हैंडलर से हिंदी में निर्देश ले रहे थे, इसलिए इसकी प्रबल संभावना है कि उनके आका हिंदुस्तान में ही हैं। टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार
बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।
बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए वसीम और नईम को राजकोट और भावनगर से रविवार को सुबह-सुबह गिरफ्तार किया गया था। एटीएस ने खुलासा किया है कि
दोनों अकेले दम पर कहर बरपाने के बाद सीरिया भागने की योजना बना रहे थे। दोनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुताबिक उनकी कॉल डिटेल से इस बात का पता चला
है कि मुफती अब्दुस समी कासमी (आईएस का विवादित उपदेशक) द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल वसीम रामोदिया के नाम और नेहरू नगर, स्ट्रीट 2, रैया रोड,
राजकोट, गुजरात के पते पर दर्ज है।
मुफ्ती कासमी को एनआईए ने फरवरी 2016 में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह भारत में आईएस के लिए काम करता है। वसीम के टेक्निकल सर्विलांस से यह
भी खुलासा हुआ है कि वह अपने छोटे भाई नईम के बराबर संपर्क में था और दोनों आईएस की गतिविधियों के बारे में बातचीत करते थे। टेलीफोन पर उनकी आवाज और
टोन का विश्लेषण करने से यह पता चला है कि वे आईएस के विचारों से बेहद प्रभावित थे। एटीएस ने एफआईआर में दोनों भाइयों से उनकी बेगमों से फोन पर बातचीत के
ट्रांस्क्रिप्ट का भी जिक्र किया है।
सर्विलांस से यह भी पता चला है कि वसीम जिस अज्ञात हैंडलर से निर्देश प्राप्त करता था वह ऑनलाइन प्रोफाइल पर ‘बिग कैट’ के नाम से दर्ज है। वसीम निंजा फॉक्स के
नाम से फर्जी आईडी बना रखी थी। दोनों में संदेशों का आदान-प्रदान हिंदी में होता था जिससे एटीएस को संदेह है कि हैंडलर दक्षिण एशियाई था और संभवत: भारतीय था।
एफआईआर के मुताबिक टेलीफोन संदेश से यह पता चला है कि वसीम को हैंडलर बार-बार बड़े हमले और काफिरों की हत्या के लिए उकसाता रहता था।