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केंद्र की सियासत: क्या मुख्यमंत्री बनर्जी को 2024 में पीएम का चेहरा बनाने में जुटे हैं प्रशांत किशोर? खास मिशन पर काम कर रहीं ममता 

सार

ममता बनर्जी ने 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को विस्तार दिया था। एक बार फिर वह इसी अभियान में जुट गई हैं। इस बार मिशन-100 का अभियान सफल बनाने के लिए उन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है।
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ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में जिस तरह से भाजपा के नेताओं का उत्साह बैठ रहा है, ममता बनर्जी की बांछें खिल रही हैं। कारण साफ है कि वामदल पहले से पस्त हो चुके हैं और कांग्रेस पार्टी ने राज्य में अपनी ताकत खो दी है। ऐसे में ममता बनर्जी के राजनीतिक अभियान के मुख्य रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उन्हें मिशन-100 का सपना दिखाया है। यानी लोकसभा चुनाव-2024 में तृणमूल कांग्रेस के 100 सांसद। हालांकि कांग्रेस और भाजपा के नेता इसे तृणमूल कांग्रेस की नेता का दिवास्वप्न बताते हैं। पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता राजकमल पाठक कहते हैं कि सपने देखने का किसी को भी हक है। अब कोई किसी के कहने पर मुंगेरी लाल की तरह सपने देखने लगे तो वह क्या कर सकते हैं?

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ममता बनर्जी ने 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भी अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को विस्तार दिया था। एक बार फिर वह इसी अभियान में जुट गई हैं। इस बार मिशन-100 का अभियान सफल बनाने के लिए उन्होंने एड़ी चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। उनके इस अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ही हैं। यह वही प्रशांत किशोर हैं, जिनके कुछ समय पहले कांग्रेस में शामिल होने की खबर थी। 

प्रशांत किशोर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के गुड बुक में आते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से वह लगातार कांग्रेस को कमजोर करने के अभियान में जुट गए हैं। ममता बनर्जी के मिशन-100 के अभियान में उनके निशाने पर कांग्रेस के असंतुष्ट अथवा बागी नेता हैं। इस कड़ी में कांग्रेस महिला मोर्चा की पूर्व अध्यक्ष सुष्मिता देव के तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर लेने पर राजनीतिक गलियारे में सनसनी फैल गई थी। क्योंकि वे प्रियंका राहुल गांधी की टीम की सदस्य के रूप में गिनी जाती थीं। 
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ताजा नाम भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए कीर्ति आजाद और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर का भी जुड़ चुका है। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता उनकी पार्टी को 35 से ज्यादा सीटों पर जिताएगी। बताते हैं प्रशांत किशोर की गणना में यह आंकड़ा 42 में से 38 सीटों के करीब का बैठ रहा है। शेष 62 सीटों को अन्य राज्यों से जीतने की तैयारी है। इसके लिए कांग्रेस के बागी और असंतुष्ट नेता तृणमूल कांग्रेस की पहली पसंद बने हुए हैं।

क्या सुब्रमण्यम स्वामी भी बनेंगे तृणमूल कांग्रेसी?
भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने वाला है। वह कई दलों के नेताओं के संपर्क में हैं। इसी क्रम में  वह ममता बनर्जी के भी संपर्क में आए हैं। इसको देखकर कयास लगाए जा रहे हैं कि सुब्रमण्यम स्वामी जल्द ही तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इससे पहले स्वामी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के संपर्क में थे। 

राजनीतिक गलियारे में तब भी लोग चौंक गए थे, जब उन्हें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का संदेश मिला था। कहा जा रहा है कि भाजपा से सुब्रमण्यम स्वामी को राज्यसभा का अगला कार्यकाल मिलना मुश्किल है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह स्वामी का लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर राजनीतिक हमला करना बताया जा रहा है। बताते हैं इसलिए स्वामी को भी एक नए दरवाजे की तलाश है।

ममता बनर्जी दिल्ली में ही थी, पीएम से मिली और राजनीतिक सक्रियता भी जारी है
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में हैं। बुधवार को उन्होंने शाम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी भेंट की। प्रधानमंत्री से मिलकर मुख्यमंत्री ने सीमाक्षेत्र में बीएसएफ के 50 तक दायरे को बढ़ाने को लेकर अपनी चिंता जताई और इस आदेश को वापस लेने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना है। 

प्रधानमंत्री से ममता बनर्जी ने उद्योगों की हालत को लेकर बातचीत की और उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आयोजित समिट में हिस्सा लेने का न्यौता दिया। इसके अलावा ममता बनर्जी का कई और नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है। राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से भी उनके मिलने की संभावना है। 

बताते हैं कि ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा में उ.प्र. के राजनीतिक चुनाव के बाबत भी भेंट मुलाकात प्रस्तावित हैं। वह एनसीपी के नेता शरद पवार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी मिल सकती हैं। इसके लिए वह 30 नवंबर को मुंबई के दौरे पर रहेंगी। ममता बनर्जी के इस प्रयास को 2024 में तैयार होने वाले विपक्षी नेताओं के मंच तथा विपक्षी एकता से जोड़कर देखा जा रहा है।

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