पढ़िए मामले पर कब क्या-क्या हुआ?
बता दें कि 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने यह फैसला सुनाया था कि विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जाए। एक हिस्सा रामलला के लिए, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा मुसलमानों को दिया जाए। 30 सितंबर 2010 को जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया था।
अपने आदेश में बेंच ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि के तीन बराबर हिस्सा किए थे। राम मूर्ति वाले पहले हिस्से में राम लला को विराजमान कर दिया गया। राम चबूतरा और सीता रसोई वाले दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े को दिया गया और बाकी बचे हुए हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था।
पिछली सुनवाई के बाद सीनियर वकील राजीव धवन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के 1994 के उस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लाम में नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद की जरूरत नहीं है। इसके बाद तीन सदस्यीय बेंच इस फैसले के खिलाफ 13 याचिकाओं पर सुनवाई की है। इनमें एक याचिकाकर्ता एम सिद्दिकी हैं।
16वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद को साल 1992 में ढहा दिया गया था, जिसके बाद लाखों कार सेवकों ने मांग की कि यहां राम मंदिर बनना चाहिए, क्योंकि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था। साल 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के घोषणापत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। बीजेपी ने दोनों चुनाव में जीत दर्ज की थी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष कोर्ट से कहा था कि कुछ मुस्लिम समूह ‘इस्लाम का अभिन्न हिस्सा मस्जिद के नहीं होने’ संबंधी 1994 की टिप्पणी पर पुनर्विचार करने की मांग कर लंबे समय से लंबित अयोध्या मंदिर - मस्जिद भूमि विवाद मामले में विलंब करने की कोशिश कर रहे हैं। अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने उप्र सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा था कि यह विवाद करीब एक सदी से अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहा है।
...जब वसीम रिजवी ने कहा, मेरे सपनों में भगवान राम आए थे
मेरे सपनों में भगवान राम आए थे। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ कट्टरपंथी मुसलमान पाकिस्तान के झंडे को इस्लाम का झंडा बताकर उससे प्यार करना अपना ईमान समझते हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग राम जन्मभूमि पर पंजा जमाए हुए हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि अयोध्या राम का जन्म स्थान है मुस्लमानों के तीनों खलीफाओं का कब्रिस्तान नहीं।
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कुछ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पाकिस्तान से पैसा लेकर कांग्रेस की मदद से राम मंदिर का मामला कोर्ट में उलझाए हुए हैं। भारत में फसाद कराने वाले ऐसे मुल्ला यहां लाशों को गिनकर पाकिस्तान से अपने काम का इनाम लेते हैं।
उन्होंने कहा कि 'मौलवी के हर काम का एक फिक्स रेट है, कैसी टोपी-कैसी दाढ़ी सबका अपना पेट है।' राम मंदिर को लेकर रिजवी ने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का फैसला अब जल्दी हो जाना चाहिए, राम भक्तों के साथ साथ खुद राम भी इस मामले में उदास हो गए हैं।